Navsari Loksabha Seat: नवसारी सीट है भाजपा का गढ़, यहां जीत की हैट्रिक लगा चुकी है BJP

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गुजरात की नवसारी लोकसभा सीट 2008 परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2009 में यहां पहली बार चुनाव हुए थे, तब से सीआर पाटिल यहां से सांसद हैं. यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है. पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस यहां जीत हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिल सकी.

नवसारी लोकसभा सीट सूरत शहर की चार और नवसारी जिले की तीन विधानसभा आती है. यहां सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है. यह बीजेपी के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती है. ऐतिहासिक तौर पर बात करें तो यह पारसी समुदाय के हिसाब से ऐतिहासिक शहर है. ऐसा कहा जाता है कि पारसी समुदाय का जब भारत में आगमन हुआ तो वह सबसे पहले यहीं ठहरा था.

लोकसभा सीट की खासियत

नवसारी लोकसभा क्षेत्र को सातवीं सदी में नवसारिका के नाम से जाना जाता था. 1 मई 1949 को यह क्षेत्र सूरत जिले का हिस्सा था. 1964 में जब सूरत का पुनर्गठन हुआ तब इसे वलसाड में शामिल कर दिया गया था और 1997 में इसे अलग जिला घोषित कर दिया गया. यह वही जिला है, जिसमें पारसी सबसे पहले आकर रुके थे. यहां कपास, ज्वार बाजरा और इमारती लकड़ी का व्यापार होता है. यहां लकड़ी से कलात्मक चीजें भी बनाई जाती है.

लोकसभा सीट का इतिहास

नवसारी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सीआर पाटिल सांसद हैं, जो लगातार पिछले तीन चुनावों से यहां जीत हासिल कर रहे हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के धर्मेश भाई भीम भाई को हराया था. इस चुनाव में सीआर पाटिल को 66 प्रतिशत वोट मिले थे. इससे पहले 2014 में उन्होंने कांग्रेस के मकसूद मिर्जा को हराया था. परिसीमन के बाद पहली बार 2009 में हुए चुनाव में सीआर पाटिल ने कांग्रेस के धनसुख राजपूत को पराजित किया था. सीआर पाटिल गुजरात भाजपा के अध्यक्ष हैं और दक्षिण गुजरात के बड़े नेता माने जाते हैं.

यह है सीट का समीकरण

नवसारी लोकसभा क्षेत्र में सूरत जिले के चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं, इनमें लिंबायत, उधना माजुरा, चोर्यासी हैं, इसके अलावा नवसारी जिले के जलालपोर, नवसारी और गणदेवी विधानसभा क्षेत्र भी इस लोकसभा सीट का हिस्सा हैं. इन सभी सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी इन सीटों पर भाजपा आगे रही थी. इस जिले की कुल आबादी 31,99,734 है, इनमें 81 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं. यहां आदिवासी वोटों की संख्या ज्यादा है. यहां कुल 12 प्रतिशत लोग एसटी वर्ग के हैं, जबकि 2 प्रतिशत लोग एससी वर्ग के हैं.

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