बीट रिपोर्ट: कैप्टन की गलती से सबक, पंजाब कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी… 5 दिग्गजों का राहुल गांधी ने लिया ‘टेस्ट’, जल्द होगा नए सूबेदार का एलान!

पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी राज्य लीडरशिप बदलने की तैयारी में है. हाई कमान ने इसके लिए कई बैठकें की हैं और राहुल गांधी ने टॉप 5 दावेदार नेताओं चन्नी, बाजवा, सिंगला, अमर सिंह और रंधावा से अकेले में मुलाकात की है. इन नेताओं से पंजाब की राजनीति, पार्टी की रणनीति और मौजूदा कमजोरियों को लेकर सवाल पूछे गए.

पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी रणनीति बदलने की तैयारी में है. पार्टी हाई कमान राज्य की लीडरशिप में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है. इसके लिए राहुल गांधी ने पंजाब के टॉप 5 नेताओं से अकेले में मुलाकात की है.

पंजाब में बीजेपी अपनी ताकत बढ़ा रही है और सत्ता में बैठी आम आदमी पार्टी अपनी एकमात्र राज्य सरकार को बचाने में पूरी ताकत लगा रही है. इस माहौल में कांग्रेस के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं दिख रहा.

इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस लीडरशिप अब राज्य की पूरी टीम को बदलने पर विचार कर रही है ताकि पार्टी इस मुकाबले में मजबूती से उतर सके.

हाई कमान ने इस मामले में कई बैठकें की हैं और अब पंजाब में लीडरशिप बदलने के फैसले के बहुत करीब पहुंच चुकी है. एक कमेटी बनाई गई थी जिसका काम था राज्य के राजनीतिक हालात को समझना और यह तय करना कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पंजाब कांग्रेस की कमान किसे दी जाए.

इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पार्टी को सौंप दी है. इसी कड़ी में राहुल गांधी ने टॉप के पांच दावेदार नेताओं से एक-एक करके मुलाकात की है. कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने बताया कि यह फैसला लेने में काफी समय लग रहा है.

उनके मुताबिक पहले पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात हुई, फिर पार्टी ने ऑब्जर्वर नियुक्त किए. इसके बाद अजय माकन और मीनाक्षी नटराजन के साथ भी कई दौर की बैठकें हुईं. उनका कहना है कि एक-दो दिन में फैसला सामने आ सकता है.

रविवार का दिन इस मामले में बहुत अहम रहा जब राहुल गांधी ने पंजाब के पांच बड़े नेताओं से सीधी बातचीत की. इनमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा, किसान पृष्ठभूमि से आने वाले विधायक विजय इंदर सिंगला, राज्यसभा सांसद अमर सिंह और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल थे. इन सभी से पंजाब की राजनीति को लेकर कई सवाल पूछे गए.

बैठक की जानकारी रखने वाले एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि राहुल गांधी ने पंजाब में आगे क्या होने वाला है, राजनीतिक हालात कैसे हैं, कांग्रेस का आगे का एजेंडा क्या होना चाहिए, इस तरह के कई सवाल पूछे. उन्होंने यह भी पूछा कि कौन सा नेता कांग्रेस के लिए सबसे मजबूती से खड़ा हो सकता है और मौजूदा राज्य यूनिट में क्या कमी है.

कांग्रेस के लिए आगे की राह बहुत संभलकर चलने वाली है. मुकाबला तीन तरफा हो सकता है क्योंकि बीजेपी की दिलचस्पी भी अब पंजाब में बढ़ गई है, खासकर तब से जब आम आदमी पार्टी के कुछ सांसद पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गए हैं. बीजेपी अब आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा और संदीप पाठक पर भरोसा कर रही है क्योंकि ये दोनों नेता आम आदमी पार्टी के भीतरी कामकाज को बहुत अच्छे से जानते हैं.

कांग्रेस की कोशिश होगी कि वह सत्ता आम आदमी पार्टी से वापस छीने और साथ ही हिंदू वोटरों तक पहुंच बनाकर बीजेपी को भी टक्कर दे, जबकि अपने पुराने सिख वोट बैंक को भी बनाए रखे.

कांग्रेस के सामने पुरानी गलतियों का डर भी मौजूद है. पार्टी पहले भी लीडरशिप बदलने के मामले में चूक कर चुकी है, जिसकी वजह से कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे बड़े नेता पार्टी छोड़कर चले गए थे और बाद में पार्टी को विधानसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. यही वजह है कि इस बार पार्टी बहुत सोच-समझकर और धीरे-धीरे फैसला ले रही है, साथ ही विरोधी पार्टियों की चाल पर भी नजर बनाए हुए है.

पार्टी एक ऐसी टीम बनाने की सोच रही है जिसमें जाट सिख, दलित सिख और हिंदू समुदाय तीनों की नुमाइंदगी हो. इसमें विजय इंदर सिंगला का नाम चर्चा में है, जो एआईसीसी सेक्रेटरी हैं. सिंगला संगरूर से पूर्व सांसद रह चुके हैं और कांग्रेस में हिंदू चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं. वह मालवा क्षेत्र से आते हैं, जहां करीब 69 विधानसभा सीटें आती हैं और यह इलाका राजनीतिक रूप से बहुत अहम माना जाता है. 2014 में सिंगला संगरूर से लोकसभा चुनाव हार गए थे, उन्हें हराने वाले भगवंत सिंह मान बाद में पंजाब के मुख्यमंत्री बने.

दूसरा नाम जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी का है. चन्नी मुख्यमंत्री रहते हुए पिछले विधानसभा चुनाव में दो सीटों से चुनाव हार गए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव जीतकर वापसी की. इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा फिलहाल विधानसभा में कांग्रेस के नेता हैं और वह जाट सिख समुदाय की नुमाइंदगी कर सकते हैं.

हालांकि पंजाब के एक सीनियर नेता का कहना है कि पंजाब की राजनीति यूपी और बिहार जैसी जाति आधारित नहीं है. उनके मुताबिक यह तय होगा कि कौन नेता आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ी चुनौती दे सकता है और पार्टी को आक्रामक तरीके से आगे ले जा सकता है, असली फैसला इसी आधार पर होगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *