सुपरस्टार से ‘जन नेता’ बनने चले विजय की फिल्म का सेंसर से क्यों छिड़ा पंगा? कोर्ट पहुंचा मैटर, गरमाई पॉलिटिक्स

थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायगन’ रिलीज से ठीक पहले सेंसर के पेंच में फंस गई है. मामला सीधे हाई कोर्ट पहुंच चुका है और राजनीतिक साजिश का आरोप लगने लगा है. विजय की आखिरी फिल्म सिर्फ सिनेमा नहीं, तमिलनाडु की राजनीति का भी हॉट मुद्दा बन गई है.

थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायगन’ (हिंदी टाइटल— ‘जन नेता’) शुक्रवार को रिलीज के लिए शिड्यूल है. लेकिन अभी तक इसकी एडवांस बुकिंग पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है. वजह ये है कि दो दिन बाद रिलीज होने जा रही ‘जन नायगन’ को अब तक सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है.

अपनी पॉलिटिकल पार्टी बनाकर पूरी तरह राजनीति के दंगल में उतरने को तैयार विजय पहले ही अनाउंस कर चुके हैं कि ‘जन नायगन’ उनकी आखिरी फिल्म है. मगर चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही उनकी फिल्म पर तगड़ा पंगा खड़ा हो गया है. मेकर्स सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं. विजय फैन्स को इस पूरे मामले में राजनीतिक साजिश की बू आ रही है.

क्यों विवाद में फंसी ‘जन नायगन’?

राजनीति में उतरने से पहले ‘जन नायगन’ विजय की आखिरी फिल्म है. ट्रेलर में वो ऐसे हीरो के रोल में दिखते हैं जो जनता को सरकार से सवाल पूछने, सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मोटिवेट करता है. विजय की फिल्मों में इस तरह की थीम नई नहीं है. ‘थलाइवा’ (2013), ‘कथ्थी’ (2014), ‘मर्सल’ (2017) और ‘सरकार’ जैसी फिल्मों में भी ऐसी थीम्स रही हैं.

माना जाता है कि ऐसी एंटी-एस्टैब्लिशमेंट फिल्मों ने ही विजय की ‘जनता की आवाज’ वाले हीरो की इमेज बनाई, जिसे अब वो राजनीति में इस्तेमाल कर रहे हैं. तमिलनाडु में सिनेमा को राजनीति की सीढ़ी बनाना नया नहीं है. एम. करुणानिधि, एमजीआर और जे. जयललिता जैसे कई पूर्व मुख्यमंत्री इसी रास्ते से सत्ता के शिखर तक पहुंचे

ऐसे में उम्मीद थी कि ‘जन नायगन’ विजय की ‘जन नेता’ वाली इमेज को और मजबूत करेगी. लेकिन रिलीज डेट बेहद करीब है और अब तक सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है. इसी वजह से ‘जन नायगन’ या इसके हिंदी वर्जन ‘जन नेता’ की एडवांस बुकिंग भी पूरी तरह नहीं खुल पाई है.

कोर्ट पहुंचा ‘जन नायगन’ का मामला

मंगलवार को ‘जन नायगन’ के मेकर्स ने सेंसर सर्टिफिकेट की मांग को लेकर हाई कोर्ट में ‘अर्जेंट’ याचिका दायर की. प्रोडक्शन हाउस KVN प्रोडक्शंस का आरोप है कि सर्टिफिकेट ‘अनुचित रूप से’ रोका गया है, जिससे उन्हें भारी फाइनेंशियल लॉस हो सकता है.

लाइव लॉ के मुताबिक, मेकर्स ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 18 दिसंबर 2025 को सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था. 19 दिसंबर को रीजनल ऑफिस ने इसे स्वीकार किया. 22 दिसंबर को बताया गया कि कुछ बदलावों के बाद फिल्म को ‘U/A’ सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की गई है. 24 दिसंबर को मेकर्स ने रिवाइज्ड वर्जन जमा किया.

29 दिसंबर को सूचना दी गई कि फिल्म को ‘U/A’ सर्टिफिकेट मिल जाएगा, लेकिन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ. 5 जनवरी 2026 को प्रोड्यूसर वेंकट नारायण को ईमेल मिला कि सिनेमैटोग्राफ सर्टिफिकेशन रूल्स के रूल 24 के तहत फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया है. वजह बताई गई कि एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म धार्मिक भावनाओं को आहत करती है और आर्म्ड फोर्सेज की प्रस्तुति आपत्तिजनक है.

मेकर्स का तर्क है कि जब फिल्म सिर्फ सेंसर कमेटी ने देखी है, तो फिल्म के कंटेंट को लेकर पब्लिक से इस तरह की शिकायत मिलना ‘संदिग्ध’ है. कमेटी द्वारा सर्टिफिकेट की सिफारिश के बाद रूल 24 लागू करना कानून के खिलाफ है.

कोर्ट ने सीबीएफसी से उन शिकायतों को पेश करने को कहा है, जिनके आधार पर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी में भेजा गया. अगली सुनवाई बुधवार, 7 जनवरी को होगी.

क्यों छिड़ा राजनीतिक दंगल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कलगम (TVK) के सदस्य इसे राजनीतिक साजिश मान रहे हैं. विजय ने खुद कहा है कि वो DMK और AIADMK— दोनों के खिलाफ खड़े हैं. इसलिए उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में तीसरी बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है. फैन्स का मानना है कि ‘जन नायगन’ से जुड़ा विवाद असल में विजय पर दबाव बनाने की कोशिश है.

फिल्म बनकर तैयार है और फैन्स विजय को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देखने के लिए. ‘जन नायगन’ के ट्रेलर को धमाकेदार रिस्पॉन्स मिला है और जहां एडवांस बुकिंग खुली हैं, वहां टिकट जमकर बुक हो रहे हैं. मगर ‘जन नायगन’ विजय के थिएटर्स तक पहुंचने में सेंसर सर्टिफिकेट एक बहुत बड़ी दीवार है. देखना है कि हाई कोर्ट बुधवार को ये दीवार गिराता है या फिर ये मामला अभी और लंबा चलेगा.

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