महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट की अच्छी पहल, मोदी सरकार बनाएगी मासिक धर्म अवकाश पर नई पॉलिसी

नई दिल्ली: भारत की महिलाएं अब ना केवल घर बल्कि दफतरों में भी पुरुषों के बराबर काम कर रही है। हालांकि उन्हें अपने मासिक धर्म के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं की परेशानी को देखते हुए उन्हें अधिक छुट्टी दी जाए या नहीं इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका पर सुनवाई की गई। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह महिला कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश पर एक मॉडल नीति तैयार करे।
इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ द्वारा की गई। जिसमें यह सवाल रखा गया कि छुट्टी अधिक महिलाओं को कार्यबल का हिस्सा बनने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेगी? ऐसी छुट्टियों का असर महिलाओं के कार्यबल पर पड़ेगा।
कार्यबल पर पड़ेगा असर
जिससे महिलाएँ कार्यबल से और भी ज्यादा दूर हो जाएंगी और ऐसा हम बिल्कुल नहीं चाहते है। साथ ही यह भी कहा गया कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कंपनियां महिलाओं की हायरिंग कम कर सकती हैं। इस तरह के मामलों में अदालत का निर्णय प्रतिकूल और हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसे मामले नीति से संबंधित हैं। इसलिए अदालत इस पर फैसले नहीं दे सकती।
बता दें कि इस मामले को लेकर मई 2023 में एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें महिलाओं के मासिक धर्म को ध्यान में रखते हुए 3 दिनों की छुट्टी की मांग की गई थी। जिसपर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेश वकील को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव तथा अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के पास जाने की अनुमति दे दी गई।
साथ ही पीठ की ओर से इस मामले पर सचिव से नीतिगत स्तर पर विचार करने की अपील की गई। इस मामले में सभी पक्षों को देखते हुए फाइनल किया जाएगा कि क्या इस मुद्देपर एक माडल नीति बनाई जा सकती है।

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