
हरियाणा के नूंह जिले में साइबर अपराध पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने 58 गांवों को निगरानी में रखा है. सरपंचों को नोटिस जारी कर साइबर अपराधियों को संरक्षण देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
हरियाणा के नूंह जिले में बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू किया है. ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत जिले के 58 गांवों को विशेष निगरानी में रखा गया है. पुलिस का कहना है कि इन गांवों का नाम बार-बार ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट और OLX फ्रॉड जैसे मामलों में सामने आया है. इसी वजह से प्रशासन ने अब गांव स्तर पर जवाबदेही तय करने की तैयारी की है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को इस विशेष अभियान के तहत चिन्हित गांवों के सरपंचों को कानूनी नोटिस जारी किए गए. नोटिस में साफ कहा गया है कि यदि किसी सरपंच पर साइबर अपराधियों को शरण देने या उनकी मदद करने का आरोप साबित होता है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पुलिस ने इसे अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम कदम बताया है.
ऑपरेशन क्लीन’ का मुख्य उद्देश्य केवल साइबर ठगों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उनके पूरे सपोर्ट सिस्टम को खत्म करना है. पुलिस का मानना है कि कई मामलों में अपराधियों को स्थानीय स्तर पर मदद और संरक्षण मिलता है, जिससे वे लंबे समय तक कानून की पकड़ से बच जाते हैं. अब ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि लगातार सामने आ रहे साइबर फ्रॉड मामलों के कारण पूरे जिले की छवि प्रभावित हो रही है. नूंह की पहचान अब साइबर अपराध के केंद्र के रूप में बनने लगी है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है. इसी वजह से गांवों के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है.
पुलिस के अनुसार, निगरानी में रखे गए अधिकांश गांव पुन्हाना, बिछौर और फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्रों में आते है. इन इलाकों से पहले भी साइबर ठगी के कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच के दौरान यह भी शिकायतें मिली हैं कि कुछ स्थानीय लोग अपराधियों को सहयोग या संरक्षण देते हैं.
अधिकारियों ने बताया कि कई साइबर फ्रॉड मामलों की जांच में इन गांवों के लोगों की संलिप्तता सामने आई है. हालांकि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अपराधियों को मिलने वाले स्थानीय समर्थन की वजह से चुनौती बढ़ जाती है. इसलिए अब केवल अपराधियों ही नहीं, बल्कि उनकी मदद करने वालों पर भी नजर रखी जाएगी.
नूंह पुलिस ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि साइबर अपराध में शामिल लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए और उनकी गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दी जाए. पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, जिन गांवों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में किया जा रहा है, वहां विशेष अभियान चलाकर अपराधियों, उनके सहयोगियों और उन्हें संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.