
हफ्ते के तीसरे कारोबारी घरेलू शेयर बाजार में हरे निशान पर कारोबार का अंत हुआ। सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआती कमजोरी के बावजूद हरे निशान पर सत्र का समापन करने में सफल रहे।
बुधवार को प्रमुख एशियाई बाजारों में छाई सुस्ती और कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों ने जबरदस्त लचीलापन दिखाया। तेल व गैस, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में हुई जोरदार खरीदारी के दम पर घरेलू सूचकांकों ने दिन के निचले स्तरों से शानदार रिकवरी की और बाजार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा।
घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कमजोरी के बावजूद हरे निशान पर कारोबार का समापन हुआ। सेंसेक्स 117.54 (0.16%) अंकों की बढ़त के साथ 75,318.39 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर निफ्टी 41 अंक (0.17%) की बढ़त के साथ 23,659 पर बंद हुआ। बुधवार के सत्र के बाद हिंडाल्को 4 प्रतिशत तो रिलायंस के शेयर 3% की बढ़त के साथ बंद हुए। लगातार नौवें सत्र में गिरावट दर्ज करते हुए, रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे गिरकर 96.83 (अस्थायी) के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.89 पर खुला, फिर और गिरकर 96.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर और 96.65 के उच्च स्तर को छूते हुए अंत में 96.83 (अस्थायी) पर स्थिर हुआ, जो अपने पिछले बंद भाव से 13 पैसे की गिरावट दर्ज करता है। पिछले सत्र में रुपया डॉलर के मुकाबले 50 पैसे गिरकर 96.70 पर बंद हुआ था।
सूचकांकों का हाल और सेक्टोरल प्रदर्शन
सेक्टोरल इंडेक्स के मोर्चे पर निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे आगे रहा, जिसमें 1.67 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.82 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में 0.68 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में भी सकारात्मक रुख रहा, जहां निफ्टी पीएसयू बैंक 0.50 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया में 1.43 प्रतिशत की सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि एफएमसीजी और आईटी सेक्टर भी नुकसान में रहे।
बाजार में शानदार रिकवरी के मुख्य कारण
बाजार के इस रुझान पर जिओजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर ने बताया कि बड़े शेयरों (लार्ज कैप) में हुई चुनिंदा खरीदारी के कारण बाजार निचले स्तरों से उबरने में सफल रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑटो और वित्तीय कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) के बेहतर नतीजों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया है। इसके अलावा, हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और रिफाइनरों के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और हालिया करेक्शन के बाद रियल्टी शेयरों में निवेशकों ने ‘वैल्यू बाइंग’ की है।
वैश्विक दबाव और रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
घरेलू बाजार में तेजी के बीच कुछ चिंताजनक वृहद-आर्थिक कारक भी हावी रहे। बुधवार को भारतीय रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर फिसल गया और डॉलर के मुकाबले 96.86 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। नायर के अनुसार, रुपये की लगातार कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था में महंगाई और मार्जिन के दबाव को बढ़ा रही हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं और अधिक गहरा गई हैं।
फेडरल रिजर्व के मिनट्स पर नजर
वैश्विक परिदृश्य में सुस्ती का आलम यह रहा कि जापान का निक्केई 225, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सहित अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। इन सबके बीच अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अप्रैल नीति के जारी होने वाले ‘मिनट्स’ पर टिकी है, जिससे ब्याज दरों को लेकर आगे की दिशा तय होगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार का व्यापक रुझान एक सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है, जिसमें सेक्टर और स्टॉक-विशेष के आधार पर निवेश के अवसर मिलते रहेंगे।

