
शुरुआती कारोबार में 900 अंकों की भारी गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने शानदार वापसी करते हुए हरे निशान पर कारोबार खत्म किया। शेयर बाजार के इस बड़े उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर (96.33) पर
घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सोमवार को हरे निशान पर बंद हुए। सेंसेक्स मामूली रूप से 77.05 अंकों की वृद्धि दर्ज कर 75,315.04 पर बंद हुआ। निफ्टी में 6.45 अंकों की बढ़त के साथ 23,649.95 पर कारोबार समाप्त हुआ। सोमवार के कारोबारी सत्र के बाद एयरटेल में 2% की वृद्धि, टाटा स्टील में 3% की गिरावट दर्ज की गई।डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 96.33 (अस्थायी) पर स्थिर हुआ।
सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ार में दिन भर उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा। शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट का सामना करने के बाद, बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद किया। आईटी और चुनिंदा ब्लू-चिप शेयरों में वैल्यू बाइंग (कम भाव पर खरीदारी) ने बाज़ार को सहारा दिया, लेकिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने बढ़त को सीमित कर दिया।
शुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी
दिन की शुरुआत में, वैश्विक संकेतों और मैक्रोइकॉनोमिक चिंताओं के कारण बाज़ार में तेज बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स ने दिन के दौरान 1,134.78 अंकों तक की गिरावट दर्ज की, जबकि निफ्टी भी दबाव में था। हालांकि, दोपहर के सत्र में, आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों में चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग शुरू हुई, जिसने सूचकांकों को निचले स्तरों से उबरने में मदद की।
सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़े
शुरुआती गिरावट के बाद, 30-शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 77.05 अंक, या 0.10 प्रतिशत बढ़कर 75,315.04 पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स ने 74,180.26 का निचला स्तर छुआ। 50-शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 6.45 अंक, या 0.03 प्रतिशत बढ़कर 23,649.95 पर बंद हुआ। बीएसई पर कुल 3,034 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 1,264 शेयर बढ़े और 194 अपरिवर्तित रहे।
बाजार को प्रभावित करने वाले कारक
इस कारोबारी सत्र में कई प्रमुख कारकों ने बाज़ार की दिशा को प्रभावित किया। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सातवें सीधे सत्र में और कमजोर हुआ, जो 96.35 (अस्थायी) के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 110.1 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। इससे मुद्रास्फीति, भारत के चालू खाते की स्थिति और कच्चे तेल-संवेदनशील क्षेत्रों पर मार्जिन दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
बाजार की गिरावट के दौरान, आईटी और कुछ चुनिंदा ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों में कम भाव पर खरीदारी देखी गई, जिसने सूचकांकों को सहारा दिया। टेक महिंद्रा, इंफोसिस, भारती एयरटेल, सन फार्मा, एचसीएल टेक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसे शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर चिंताओं को बढ़ा दिया, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी रही।
किस क्षेत्र का कैसा प्रदर्शन?
बीएसई फोकस्ड आईटी में 2.53%, आईटी में 1.95%, हेल्थकेयर में 0.22% और टेलीकम्युनिकेशन में 0.05% की बढ़त देखी गई। पीएसयू बैंक में 1.81%, ऑटो में 1.74%, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी में 1.26%, मेटल में 1.13%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.05% और ऑयल एंड गैस में 1.01% की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इक्विटी में 1,329.17 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो बाज़ार के लिए एक सकारात्मक संकेत था।
आगे की राह क्या?
बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में भी बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, क्योंकि वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के कारक बाज़ार को प्रभावित करेंगे। कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और भू-राजनीतिक घटनाओं पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। आईटी और चुनिंदा डिफेंसिव शेयरों में खरीदारी की प्रवृत्ति बनी रह सकती है।
18 मई 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार ने एक अस्थिर सत्र के बाद मामूली बढ़त के साथ समापन किया। जहां आईटी और ब्लू-चिप शेयरों ने सूचकांकों को सहारा दिया, वहीं कमजोर रुपया और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाज़ार की पूरी क्षमता को सीमित कर दिया। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की नजरें अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी रहेंगी।

