152 मीटर एफआरएल पर बैराज बनाने की सहमति चाहता है तेलंगाना

मुंबई। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई के सह्याद्रि स्टेट गेस्ट हाउस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस दौरान तुम्मिदिहट्टी परियोजना पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। इस बैठक में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

तेलंगाना की क्या मांग है?
दरअसल, तेलंगाना, 152 मीटर के ‘फुल रिजर्वॉयर लेवल’ (एफआरएल) पर बैराज बनाने के लिए महाराष्ट्र की सहमति मांग रहा है। महाराष्ट्र पहले 148 मीटर की ऊंचाई पर सहमत हो गया था, लेकिन तेलंगाना सरकार का कहना है कि इस स्तर पर पानी की जरूरी मात्रा को दूसरी तरफ मोड़ना संभव नहीं होगा।

पिछली समीक्षा बैठक में क्या निर्देश दिए?
23 अक्तूबर को हुई एक समीक्षा बैठक में, रेवंत रेड्डी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जरूरी तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। इसमें पानी की उपलब्धता, बैराज की प्रस्तावित ऊंचाई और महाराष्ट्र में पानी भरने (डूबने) से प्रभावित होने वाली जमीन के दायरे जैसी जानकारी शामिल होनी चाहिए। मुख्यमंत्री को जानकारी देने वाले सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 152 मीटर के एफआरएल पर बैराज बनाने से महाराष्ट्र में लगभग 2,300 एकड़ जमीन डूब जाएगी, जबकि 150 मीटर की ऊंचाई पर यह असर 1,000 एकड़ से कम होगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र का कोई भी गांव पानी में नहीं डूबेगा। तेलंगाना सरकार इस प्रस्तावित बैराज का इस्तेमाल उत्तरी तेलंगाना, खास तौर पर अविभाजित आदिलाबाद जिले में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करना चाहती है। राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना से लगभग दो लाख एकड़ जमीन पर सिंचाई की सुविधा मिलने की योजना है।