मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक चालान (ई-चालान) व्यवस्था लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ई-चालान के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जुर्माना लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, केवल जुर्माना लगाने से यातायात की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए बढ़ते वाहनों के दबाव, अनियोजित शहरी विकास और परिवहन व्यवस्था की खामियों को दूर करना जरूरी है।

यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल पुलिस पर नहीं
राज ठाकरे सोमवार को नवी मुंबई के वाशी में परिवहन कर्मचारियों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा पोस्ट में उन्होंने कहा कि यातायात का बढ़ता दबाव और नियोजन की कमी पुलिस के साथ आम नागरिकों के लिए भी परेशानी पैदा कर रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन सड़क उपयोगकर्ताओं की समस्याओं को भी समझना होगा।

अपने ड्राइवरों को दिए नियम पालन के निर्देश
मनसे प्रमुख ने यातायात नियमों के पालन पर जोर देते हुए अपने वाहन चालकों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस सुरक्षा मिलने के बावजूद उन्होंने अपने सभी ड्राइवरों को निर्देश दिए हैं कि कितनी भी जल्दी हो, ट्रैफिक सिग्नल का उल्लंघन नहीं किया जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि वाहनों के बढ़ते पंजीकरण और आबादी के दबाव को नजरअंदाज कर यातायात प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी पुलिस पर नहीं डाली जा सकती।

फ्लाईओवर और पुलों की योजनाओं पर भी सवाल
राज ठाकरे ने कहा कि आसपास की सड़कों की क्षमता और वाहनों की आवाजाही का आकलन किए बिना फ्लाईओवर और पुलों का निर्माण करने से जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बनाते समय सड़कों पर प्रतिदिन आने वाले नए वाहनों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती आबादी को ध्यान में रखना चाहिए।

लोकल ट्रेनें बंद हुईं तो सड़कों पर बढ़ेगा दबाव
मुंबई की उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवाओं पर निर्भरता का मुद्दा उठाते हुए ठाकरे ने सवाल किया कि यदि किसी दिन लोकल ट्रेनें बंद हो जाएं और यात्रियों को निजी वाहनों से सफर करना पड़े, तो शहर की सड़कें इतना अतिरिक्त दबाव कैसे संभालेंगी? उन्होंने इसे भविष्य की परिवहन जरूरतों के लिए ठोस और दूरगामी योजना बनाने की चेतावनी के रूप में पेश किया। राज ठाकरे ने सरकार और प्रशासन से यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने चेताया कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र के शहरों में जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है।