
बिहार विधान परिषद चुनाव के 8 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों में से 5 पर जीत की घोषणा हो गई है. पटना शिक्षक सीट पर RJD के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने करीब तीन दशक से MLC रहे BJP के नवल किशोर यादव को हरा दिया. दरभंगा में जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मदन मोहन झा को 324 वोटों से शिकस्त दी, जबकि सारण में BJP से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़े राहुल राज ने जीत हासिल की. तिरहुत में NDA समर्थित नरेंद्र प्रसाद सिंह और पटना स्नातक सीट पर JDU के नीरज कुमार विजयी रहे.
बिहार में इस बार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव में आठ में से पांच सीटों के नतीजे आ चुके हैं. इस बार कहीं करीब तीन दशक से विधान परिषद में रहने वाले नेता को हार का सामना करना पड़ा, तो कहीं पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उतरे उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर ली. एक सीट पर जन सुराज ने कांग्रेस के मौजूदा MLC को हरा दिया.
बिहार की 8 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों में से 5 पर जीत की घोषणा हो चुकी है. इनमें पटना शिक्षक, तिरहुत शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, सारण शिक्षक और पटना स्नातक सीट शामिल हैं. इन पांच सीटों के नतीजों में RJD, NDA समर्थित उम्मीदवार, जन सुराज, निर्दलीय प्रत्याशी और JDU के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की. सबसे ज्यादा चर्चा पटना शिक्षक सीट पर BJP के नवल किशोर यादव की हार और सारण में राहुल राज की निर्दलीय जीत की हो रही है. आइए, एक-एक करके समझते हैं कि बिहार विधान परिषद चुनाव की इन पांच सीटों पर क्या हुआ.
सबसे पहले बात पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की. यहां BJP के नवल किशोर यादव लंबे समय से विधान परिषद के सदस्य रहे हैं. करीब तीन दशक तक सदन में रहने के बाद इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. RJD के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने नवल किशोर यादव को हराकर यह सीट अपने नाम कर ली. इस नतीजे की चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि नवल किशोर यादव इस सीट पर लंबे समय से अपनी राजनीतिक पहचान बनाए हुए थे.
तिरहुत शिक्षक सीट: 594 वोटों से जीते नरेंद्र प्रसाद सिंह
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में NDA समर्थित उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज की. उन्हें कुल 2,945 वोट मिले. उनके मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा को 2,351 वोट मिले. वहीं, CPI के संजय कुमार सिंह 1,967 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. इस तरह नरेंद्र प्रसाद सिंह ने भूषण झा को 594 वोटों से हरा दिया. तिरहुत में निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा दूसरे स्थान पर रहे. यानी मुकाबले में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी अच्छी चुनौती देते दिखाई दिए.
दरभंगा शिक्षक सीट: जन सुराज के सुरेश राय ने कांग्रेस के MLC को हराया
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने जीत हासिल की. उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा MLC मदन मोहन झा को 324 वोटों से हरा दिया. यह जन सुराज के लिए अहम नतीजा है. चुनाव में पार्टी ने कांग्रेस के ऐसे उम्मीदवार को हराया, जो पहले से विधान परिषद के सदस्य थे.
राजनीति में किसी नए या उभरते दल के लिए चुनाव जीतना सिर्फ एक सीट हासिल करना नहीं होता. इससे उसे अपने समर्थकों के बीच जगह बनाने और आगे की राजनीति के लिए आधार तैयार करने का मौका भी मिलता है. दरभंगा की जीत के बाद जन सुराज ने बिहार विधान परिषद की शिक्षक सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है.
सारण शिक्षक सीट: BJP से टिकट नहीं मिला, राहुल राज निर्दलीय लड़े और जीत गए
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की कहानी थोड़ी अलग है. यहां BJP के पूर्व नेता राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली. राहुल राज को कुल 4,965 वोट मिले. JDU के आनंद पुष्कर को 3,150 वोट मिले, जबकि जन सुराज के आफाक अहमद 2,454 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. राहुल राज को BJP से टिकट नहीं मिला था. इसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया. नतीजा आया तो वह जीत गए. इस चुनाव में राहुल राज की जीत इसलिए चर्चा में है, क्योंकि पार्टी का टिकट न मिलने के बावजूद वह अपनी उम्मीदवारी के साथ चुनाव जीतने में कामयाब रहे.
पटना स्नातक सीट: नीरज कुमार जीते, अनुज सिंह का समर्थन नहीं आया काम
पांचवीं सीट पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की है. यहां JDU उम्मीदवार नीरज कुमार की जीत की घोषणा हुई है. इस सीट पर अनंत सिंह ने अनुज सिंह का समर्थन किया था. नतीजे के बाद अनंत सिंह के आवास पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया. चुनाव से पहले वहां जश्न का माहौल होने की चर्चा थी, लेकिन अनुज सिंह की हार के बाद तस्वीर बदल गई.
इस मुकाबले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव आम विधानसभा चुनाव से अलग होता है. यहां हर मतदाता वोट नहीं डाल सकता. मतदान के लिए संबंधित स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है. ऐसे चुनावों में उम्मीदवारों को सीमित मतदाता समूह के बीच संपर्क बनाना पड़ता है. नीरज कुमार की जीत के साथ पटना स्नातक सीट पर JDU ने जीत दर्ज की.
अब तक घोषित पांच सीटों के नतीजों में किसी एक पार्टी का हर जगह दबदबा नहीं दिखता. पटना शिक्षक सीट पर RJD ने BJP के नवल किशोर यादव को हराया. तिरहुत में NDA समर्थित नरेंद्र प्रसाद सिंह जीते. दरभंगा में जन सुराज ने कांग्रेस के मौजूदा MLC को शिकस्त दी. सारण में BJP के पूर्व नेता राहुल राज निर्दलीय जीत गए और पटना स्नातक सीट पर JDU के नीरज कुमार ने बाजी मारी.
जीत के बाद नीरज कुमार का अनंत सिंह पर निशाना
पटना स्नातक सीट पर जीत तय होने के बाद JDU नेता नीरज कुमार ने आजतक से खास बातचीत में इसे NDA की जीत बताया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को इसका जवाब मिल गया है. नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में धनबल और बाहुबल की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
रसगुल्ले बंटवाने की चर्चा पर उन्होंने कहा, हमने रसगुल्ला नहीं बनवाया, हम तो बस जो लोग आते हैं, उनको चाय पिला देते हैं. मोकामा में भविष्य में विधानसभा उपचुनाव होने की स्थिति पर उन्होंने कहा कि वह अपने स्टैंड पर कायम रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि NDA जब अच्छा उम्मीदवार देगी, तो वह मोकामा जाकर उसके लिए काम करेंगे. नीरज कुमार के घर मोकामा मोलदियार टोला के पास जश्न में जमकर पटाखे फोड़े जा रहे हैं. वहीं समर्थक सड़क पर जश्न मना रहे हैं.
नीरज कुमार की जीत के बाद अनंत सिंह के आवास पर पसरा सन्नाटा
नीरज कुमार की जीत कंफर्म होते ही पटना में अनंत सिंह के आवास पर सन्नाटा पसर गया. एक दिन पहले तक यहां जश्न का माहौल था, लेकिन अनुज सिंह की हार के बाद तस्वीर बदल गई. हार पर अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें इसका कोई मलाल नहीं है. उन्होंने कहा, वोट कोई दुकान से खरीदकर लाने की चीज नहीं है. जनता मालिक है और जनता जिसे वोट देती है, वही जीतता है.
अनंत सिंह ने माना कि उनके समर्थित प्रत्याशी को उम्मीद से कम वोट मिले, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि जनता ने उन्हें इतने वोट दिए. उन्होंने यह भी कहा कि पटना स्नातक सीट का चुनाव आम जनता का चुनाव नहीं होता. इसमें वही लोग वोट करते हैं, जिन्होंने पहले से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया होता है. उनके मुताबिक, नीरज कुमार और दूसरे प्रमुख प्रत्याशी लंबे समय से अपने वोटर तैयार कर रहे थे, जबकि उनके समर्थित प्रत्याशी को इलाके में लोग ठीक से जानते तक नहीं थे.
