सूरत. विश्व की सबसे ऊंची ऑफिस बिल्डिंग यानी डायमंड बुर्स के प्रबंधन को उद्घाटन से पूर्व कंस्ट्रक्शन कंपनी के दावे के मामले में फौरी राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किए गए 631 करोड़ रुपए का बिल नहीं चुकाने के दावे को लेकर 16 दिसम्बर को होने वाली सुनवाई पर रोक लगा दी है।
सूरत डायमंड बुर्स की प्लानिंग एंड निर्माण कमेटी के समन्वयक लालजी पटेल(Lalji Patel) ने एक बयान जारी कर बताया कि पीएसपी प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी का दावा बेबुनियाद है। डायमंड बुर्स के निर्माण की शर्तों के मुताबिक कंपनी को समय पर पेमेंट चुका दिया गया है। सिर्फ दो फीसदी राशि का भुगतान बाकी है तो बुर्स का कुछ काम अधूरा भी है। फाइनल सर्टिफिकेट मिलने के बाद इस राशि का भी भुगतान कर दिया जाएगा। कंपनी द्वारा किए गए दावे का हमने कानूनी जवाब दिया है। हमने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने इसे संज्ञान में लेते हुए कंपनी के दावे पर 16 दिसम्बर को होने वाली सुनवाई को टाल दिया है, इसलिए हीरा बुर्स से जुड़े सभी सदस्यों को किसी तरह की कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। समूचा कार्य नियमों के मुताबिक ही हुआ है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उल्लेखनीय है कि डायमंड बुर्स का निर्माण करने वाली पीएसपी कंट्रक्शन कंपनी ने बुर्स प्रबंधन पर 538 करोड़ रुपए का पेमेंट नहीं चुकाने का आरोप लगाते हुए सूरत की कॉमर्शियल कोर्ट में याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बुर्स प्रबंधन को एक सप्ताह के दौरान 100 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी जमा कराने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई के लिए 16 दिसम्बर का दिन तय किया है। वहीं, 17 दिसम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों सूरत डायमंड बुर्स का उद्घाटन किया जाना हैं।
