पंजाब: 2027 से पहले सेमीफाइनल साबित होंगे निकाय चुनाव, समझिए क्यों AAP के लिए है असल अग्निपरीक्षा

पंजाब निकाय चुनाव 2026 को 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। AAP के सामने सत्ता विरोधी माहौल, टिकट विवाद और विपक्ष की चुनौती बड़ी परीक्षा बन गई है।

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में 26 मई की शहरी स्थानीय निकाय चुनाव होंगे। इसे सभी राजनीतिक दल इस चुनाव में अपनी ताकत झोंकते हुए नजर आ सकते हैं। पंजाब के आठ नगर निगमों, 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों में होने वाले ये चुनाव राज्य की हर प्रमुख राजनीतिक पार्टी के लिए 2027 के विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे हैं।

शहरी चुनाव होने के बावजूद इन चुनावों का प्रभाव, शहरों से सटे हुए ग्रामीण इलाकों पर भी दिख सकता है। पंजाब के लगभग हर जिले में नगर परिषद और नगर पंचायतें हैं, जो राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से लगभग 90 सीटों को प्रभावित करती हैं। लगभग 36.73 लाख मतदाता इस चुनाव में शामिल होने वाले है।

इन चुनावों को 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद जनता के मूड की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में आठ नगर निगमों में चुनाव होंगे। इसमें बठिंडा, मोगा, अबोहर, बरनाला, बटाला, पठानकोट, कपूरथला और होशियारपुर है। निकाय चुनाव बैलेट पेपर से होगा, जिनकी गिनती 29 मई को होगी।

आम आदमी पार्टी के लिए क्या है अहमियत?

मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के लिए ये चुनाव बेहद अहम हैं। हालांकि, पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की लेकिन पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों में ऐतिहासिक रूप से राज्य स्तर की लोकप्रियता के बजाय स्थानीय समीकरणों, गुटबाजी और उम्मीदवार के प्रभाव का बोलबाला रहा है।

इसके अलावा, ऐतिहासिक रूप से स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी पार्टी को ही जीत मिलती रही है। फरवरी 2021 में हुए पिछले चुनावों में तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस ने सभी आठ नगर निगमों और 109 नगर परिषदों में से 77 में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था।.

2022 के बाद कई निगमों में दिखा था टकराव

साल 2022 के विधानसभा चुनावों में AAP की जीत के बाद कई परिषदों में AAP का बहुमत हो गया क्योंकि पार्षदों ने नव निर्वाचित सत्तारूढ़ पार्टी का साथ दिया, जबकि कई अन्य निगमों और परिषदों में AAP और विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाली परिषदों या निगमों के बीच विभिन्न विकासात्मक प्रयासों को लेकर टकराव देखने को मिला।

अब आम आदमी पार्टी के सामने चुनौती केवल चुनावी प्रदर्शन की नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों यूनियनों और यहां तक कि अपने ही संगठन के कुछ वर्गों से बढ़ती आलोचना के बीच छवि मैनेजमेंट करना भी अहम है।

नामांकन को लेकर खूब हुआ विवाद

पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने नगर निकाय चुनाव तय कर दिए हैं। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापस लेने के बाद अब 7,623 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। शुरुआत में 10,809 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। जांच के दौरान 713 नामांकन खारिज कर दिए गए, जबकि 2,393 उम्मीदवारों ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।

कुल 79 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। हालांकि, नामांकन पत्रों की अस्वीकृति ही चुनाव अभियान के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में से एक बनकर उभरी है।

बरनाला में मंगलवार को विपक्षी उम्मीदवारों के कई नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और आधे दिन का बंद घोषित किया गया।

विपक्षी उम्मीदवारों के 11 नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस मुद्दे ने विपक्ष को सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ चुनाव प्रचार का एक तैयार मुद्दा दे दिया।

राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक विपक्ष

मानसा में भी कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिले, जहां सोमवार को उप-विभागीय मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों को आशंका थी कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कई नामांकन पत्र खारिज हो सकते हैं।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि आम आदमी पार्टी के विधायक विजय सिंगला को पुलिस सुरक्षा में ले जाना पड़ा, क्योंकि प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे। हालांकि, मानसा में अंततः कोई भी नामांकन पत्र खारिज नहीं हुआ।

कृषि उत्पादों के कमीशन एजेंटों का प्रतिनिधित्व करने वाले मानसा आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष बब्बी दानेवालिया ने कहा, “अंततः मानसा में जांच के दौरान कोई भी नामांकन पत्र खारिज नहीं हुआ, जबकि अन्य जिलों में ऐसा हुआ है।”

सफाई कर्मचारियों ने निकाला गुस्सा

मलोट में भी प्रदर्शनकारियों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ मार्च निकाला। अमलोह और नाभा में श्रमिकों ने आप सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। सफाई कर्मचारियों यूनियन के सदस्यों ने हड़ताल के दौरान सड़कों पर कचरा फेंककर विरोध प्रदर्शन किया।

नाभा में सफाई कर्मचारियों ने स्थानीय विधायक गुरदेव सिंह देव मान के आवास के बाहर भी कचरा फेंककर विरोध जताया, क्योंकि यूनियन सदस्यों और विधायक के बीच तीखी बहस हुई थी।

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 6 मई से 21 मई तक चली थी। आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी का कारण बनी, क्योंकि शहरों में कचरा जमा हो गया और सीवर लाइनें जाम हो गईं।

सरकार के साथ बातचीत के बाद अंततः आंदोलन को 30 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया, जिससे चुनाव से कुछ ही दिन पहले AAP को राहत मिली है। शुक्रवार को मोहाली में सिविल सचिवालय के कर्मचारियों ने एक विशाल विरोध रैली में आम आदमी पार्टी को वोट न देने की प्रतिज्ञा की है।

AAP में आंतरिक असंतोष भी अहम

नागरिक मुद्दों में सत्ता-विरोधी लहर के अलावा आम आदमी पार्टी टिकट वितरण को लेकर आंतरिक असहमति से भी जूझ रही है। बठिंडा नगर निगम में स्थानीय विधायक जगरूप सिंह गिल ने उम्मीदवार चयन पर सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया।

वहीं आम आदमी पार्टी के व्यापार विंग के अध्यक्ष तरसेम गर्ग ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का मुख्य आरोप यह है कि संस्थापक कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई और कांग्रेस से हाल ही में पार्टी में शामिल हुए नेताओं को टिकट वितरित किए गए।

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