
विजय की राजनीतिक जीत सिर्फ स्टारडम का असर नहीं, बल्कि 15 साल की जमीनी तैयारी का नतीजा है. फैन क्लब्स को पार्टी में ढालने की रणनीति ने विजय को बड़ी कामयाबी दिलाई है. फिल्मों से कमाए फैन्स को कैसे विजय ने एक मजबूत राजनीतिक संगठन में बदला, उनकी जीत का रहस्य इसी कहानी में छुपा है.
सुपरस्टार विजय का तमिलनाडु की राजनीति में आना, एक दिन में हुई घटना नहीं थी. 2024 में अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) शुरू करने के बाद विजय ने जब तमिलनाडु के विक्रवंडी में पहली रैली की तो करीब 8 लाख लोगों की भीड़ जुट गई. जिन लोगों ने इसे एक फिल्मी सुपरस्टार के असर से जुटी भीड़ समझने की गलती की, वो तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे देखकर हैरान हैं.
कैसे पिता ने तैयार की विजय के फैन बेस की जमीन
अपने पिता, एस ए चंद्रशेखर की फिल्मों से विजय ने बतौर चाइल्ड एक्टर शुरुआत की थी. उनके पिता की इन फिल्मों के हीरो रजनीकांत और विजयकांत जैसे तमिल सिनेमा के टॉप सुपरस्टार थे. इन फिल्मों में नोटिस होने के साथ ही तमिल सिनेमा फैन्स में विजय की जगह बनने लगी. विजय का फिल्म करियर खड़ा करने में उनके पिता का रोल कितना बड़ा रहा इसे आप एक फैक्ट से समझ सकते हैं— करियर के पहले दो सालों में विजय ने 12 फिल्में कीं, जिनमें से 6 के डायरेक्टर उनके पिता थे.
ये डायरेक्टर-एक्टर कॉम्बो बॉक्स ऑफिस पर हिट भी था, और फैन्स की एक्साइटमेंट बढ़ाने के लिए फिट भी. चंद्रशेखर ने ही अपनी फिल्म रसिगन (1994) से विजय को उनका पहला स्टार टाइटल दिया— इलयाथलपति (यंग लीडर या सेनापति). साउथ में किसी भी स्टार की स्टारपावर उसके टाइटल की पॉपुलैरिटी से ही तय होती है.
विजय मास फिल्मों में हिट होते रहे और इलयाथलपति टाइटल फैन्स को याद हो गया. विजय की उम्र और फिल्मी अनुभव के साथ उनका टाइटल इलयाथलपति से थलपति में बदल गया
साउथ की पॉलिटिक्स में गेम चेंजर होते हैं फैन क्लब्स
तमिल सिनेमा में ‘रसिगर मंद्रम’ यानी फैन क्लब्स का कॉन्सेप्ट 1960 के दशक से ही खूब पॉपुलर रहा है. भारत के पहले एक्टर मुख्यमंत्री, तमिलनाडु के पॉलिटिकल आइकॉन MGR (मरुथुर गोपालन रामचंद्रन) अपने फैन क्लब्स को पॉलिटिकल सपोर्ट में बदलकर ही शिखर पर पहुंचे थे.
साउथ में इसी फॉर्मूले को तेलुगू सुपरस्टार्स ने भी आजमाया है. चिरंजीवी ने अपने फैन क्लब्स को ही अपनी राजनीतिक पार्टी प्रजा राज्यम पार्टी में बदला था. इसी फॉर्मूले पर पवन कल्याण ने अपने फैन क्लब्स के आधार पर जन सेना पार्टी बनाई और आज आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं. लेकिन तमिल सिनेमा में MGR और जयललिता के बाद सुपरस्टार विजयकांत ही कुछ हद तक इस फॉर्मूले को पॉलिटिकल पावर बनाने में कामयाब हुए थे.
हालांकि खराब सेहत और निधन के चलते उनका राजनीतिक सफर उस मुकाम तक नहीं पहुंच सका, जिसकी उम्मीद लोगों को थी. उनके बाद रजनीकांत और कमल हासन के फैन क्लब भी बहुत पावरफुल रहे. लेकिन इन दोनों सुपरस्टार्स ने इन फैन क्लब्स को सोशल वर्क के लिए ही ज्यादा इस्तेमाल किया. फैन्स इनसे पॉलिटिकल मंच पर चढ़ने की उम्मीद करते रहे मगर दोनों ने इतनी देर कर दी कि तब तक माहौल ही बदल गया.
विजय ने फैन क्लब को कैसे दी राजनीतिक पार्टी की शक्ल
90 के दशक से ही विजय के फैन क्लब्स बड़े होने लगे थे. 2009 तक तमिलनाडु में विजय के तमाम फैन क्लब्स बन चुके थे. ऐसे 85 हजार फैन क्लब्स को विजय ने एक संगठन में बदला और नाम दिया. उनके करीब छोटे-छोटे 85000 फैन क्लब्स ने 2009 में मिलकर एक बड़ा संगठन बनाया— ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम (AITVMI). इसे विजय मक्कल इयक्कम (VMI) नाम से भी जाना जाता है.
VMI के जरिए विजय पहले इनडायरेक्ट तरीके से समाज सेवा कर रहे थे. रक्तदान कैम्प, बाढ़ राहत, छात्रों को फ्री ट्यूशन, गरीबों को मुफ्त खाना और जॉब की तैयारी के लिए स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट जैसे इनिशिएटिव चलाए और जमीनी राजनीति में विजय की पैठ बनाई. लेकिन विजय की सबसे बड़ी खासियत रही कि उन्होंने फैन्स की इच्छा को सही समय पर समझा और राजनीतिक मंच पर चढ़ने की तैयारियां शुरू कर दी.
VMI ने कैसे आजमाई राजनीतिक ताकत
2011 के तमिलनाडु चुनाव में VMI ने पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा. इस संगठन के लोगों ने खुद तो चुनाव नहीं लड़ा लेकिन AIADMK के नेतृत्व वाले गठबंधन को सपोर्ट किया. इस गठबंधन की धुआंधार जीत हुई और जे जयललिता ने एक बार फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. शायद यहीं से विजय को एहसास हुआ कि उनका ये फैन क्लब एक बड़ी पॉलिटिकल पावर बन सकता है. अगले करीब दस सालों तक VMI ने सोशल वर्क ही ज्यादा किया और एक्टिव पॉलिटिक्स से दूरी ही रखी. मगर फिर 2021 में विजय ने अपने फैन्स को पॉलिटिक्स में एंट्री की फॉर्मल इजाजत भी दे दी.
2021 में तमिलनाडु के ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों में VMI के समर्थन वाले इंडिपेंडेंट कैंडिडेट 169 सीटों पर लड़े. इन चुनावों में पहली बार विजय ने प्रचार के लिए VMI कैंडिडेट्स को अपना चेहरा इस्तेमाल करने की इजाजत भी दे दी. 169 सीटों में से 129 सीटों पर VMI के समर्थन वाले कैंडिडेट जीत गए. तमिलनाडु में बने सभी 9 नए जिलों में VMI के कैंडिडेट ही जीते. 10 लाख सदस्यों वाला विजय का फैन क्लब संगठन VMI, अब एक राजनीतिक पार्टी की शक्ल लेने के लिए तैयार था.
2024 में विजय ने अपनी जिस पार्टी TVK (तमिलगा वेट्री कड़गम) की घोषणा की, वो असल में VMI ही है. इस फैन क्लब में जो जिला लेवल का प्रेजिडेंट था, वो TVK में उसी जिले का प्रेजिडेंट बन गया. इसलिए राजनीति में एंट्री और नई पार्टी की अनाउंसमेंट के साथ ही विजय को जनता में जमीनी पैठ भी हासिल थी. 2025 में TVK का विस्तार हुआ तो बूथ कमेटियां बनाई गईं, बूथ सेक्रेटरी रखे गए.
इस तरह 2026 के तमिलनाडु चुनाव से पहले विजय की TVK सिर्फ एक फिल्मी सुपरस्टार की राजनीतिक पार्टी नहीं थी. ये असल में डेढ़ दशक पुराना संगठन था, जिसने लगातार सोशल वर्क से विजय की राजनीति की जमीन तैयार की थी. इसी मजबूत जमीन पर कुर्सी रखकर अब विजय तमिलनाडु का मुख्यमंत्री पद संभालने की तरफ देख रहे हैं.

