
हरियाणा के 590 करोड़ रुपये के HPGCL बैंक फ्रॉड मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है. साथ ही CFO अमित दीवान को बर्खास्त कर दिया गया है. इस मामले में फर्जी खातों के जरिए सरकारी फंड डायवर्जन करने का आरोप है. मामले की जांच CBI को सौंपी गई है
हरियाणा में सामने आए बड़े बैंकिंग फ्रॉड मामले में राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. यह मामला हरियाणा पावर सेक्टर की कंपनी HPGCL से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले का है, जिसमें सरकारी फंड को फर्जी खातों के जरिए डायवर्ट किया गया. इस पूरे मामले ने सरकारी सिस्टम और बैंकिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी थी. अब इस केस को और गहराई से जांचने के लिए CBI को सौंप दिया गया है.
इस घोटाले में मुख्य आरोपी अमित दीवान को उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL) से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है. वह निगम में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पद पर तैनात थे. आधिकारिक आदेश (Office Order No. 361/UH/HR-II/EBG-3171, दिनांक 1 मई 2026) के जरिए यह कार्रवाई की गई. आदेश में स्पष्ट रूप से गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख किया गया है. इससे पहले उन्हें निलंबित किया गया था, लेकिन जांच में गंभीर तथ्य सामने आने के बाद सेवा समाप्त कर दी गई.
अमित दीवान को 18 मार्च 2026 को स्टेट विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी 590 करोड़ रुपये के HPGCL बैंक फ्रॉड केस में हुई थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मामले में फर्जी बैंकिंग ट्रांजेक्शन और फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी फंड को डायवर्ट किया गया. यह रकम HPGCL के उन बैंक खातों से निकाली गई, जो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित थे. इस खुलासे ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद खामियों को भी उजागर कर दिया है.
जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई फर्जी संस्थाएं बनाई गई थीं. इन शेल कंपनियों के खातों में धीरे-धीरे सरकारी पैसे ट्रांसफर किए गए. यह पूरा नेटवर्क काफी सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें कई लोग शामिल थे. अब तक इस मामले में कुल 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. अमित दीवान इस केस में गिरफ्तार होने वाले 15वें आरोपी हैं.
अमित दीवान का प्रोफाइल भी काफी अहम रहा है. वह हरियाणा के पावर सेक्टर में 27 साल से ज्यादा समय से कार्यरत थे और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते थे. घोटाले के समय वह हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) में डायरेक्टर (फाइनेंस) के पद पर थे. बाद में उन्हें UHBVNL में वापस लाकर CFO बनाया गया था. इतने वरिष्ठ पद पर रहते हुए इस तरह के आरोप सामने आना पूरे सिस्टम के लिए चिंता की बात है.
सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके. अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत हो सकती है. CBI अब बैंकिंग लेन-देन, फर्जी कंपनियों और जुड़े लोगों की भूमिका की गहराई से जांच करेगी. आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है.

