हिंदू-मुस्लिम की राजनीति के अलावा प्रधानमंत्री के पास नहीं कोई एजेंडा – जयराम रमेश

नई दिल्ली: कांग्रेस (Congress) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की एक टिप्पणी को लेकर बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की यह बात झूठ है कि वह हिंदू- मुस्लिम की राजनीति नहीं करते। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री के पास हिंदू-मुस्लिम की राजनीति को छोड़कर कोई एजेंडा नहीं था।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा है, “अगर मैं हिंदू-मुसलमान करूंगा तो मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा।” उनके बयान को लेकर रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “सारा देश भलीभांति जानता है कि निवर्तमान प्रधानमंत्री आदतन झूठ बोलते हैं और दो तरह की बातें उनकी प्रवृत्ति है। श्री मोदी का यह दावा कि वह हिंदू-मुस्लिम राजनीति नहीं करते, यह दर्शाता है कि वह झूठ बोलने में दिन प्रति दिन नई गहराइयों तक गिरते जा रहे हैं।”
उन्होंने दावा किया, “19 अप्रैल 2024 के बाद से यह सार्वजनिक सच है, एक ऐसा सच जिसे हमारी सामूहिक स्मृति से नहीं मिटाया जा सकता है, भले ही श्री मोदी अपनी निजी स्मृति से उसे मिटा दें कि प्रधानमंत्री ने खुलेआम और बेशर्मी से सांप्रदायिक भाषा, प्रतीकों और संकेतों का निरंतर उपयोग किया है।”
रमेश ने कहा, “इस सच की ओर हमने निर्वाचन आयोग का ध्यान भी आकर्षित किया है। इस मसले पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी लेकिन दुख की बात है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस पूरे चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री के पास हिंदू-मुस्लिम राजनीति को छोड़कर कोई एजेंडा नहीं था।
उनका कहना है, “प्रधानमंत्री की पार्टी के घोषणापत्र में उनकी अपनी तस्वीरों की एक शृंखला के बीच शब्दों की कच्ची-पक्की खिचड़ी को जनता ने पूरी तरह नकार दिया है। पिछले कुछ महीनों में सरकारी खजाने से भारी कीमत चुकाकर प्रचारित की गई मोदी की गारंटी औंधे मुंह गिरी है और ‘400 पार’ के खोखले नारे को चुपचाप दफना दिया गया है।”
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनाव अभियान में ‘‘प्रधानमंत्री का अंतिम, हताशापूर्ण प्रयास है कि कांग्रेस पार्टी के बारे में झूठ बोला जाए और ‘इंडिया जनबंधन’ के प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए समान विकास के एजेंडे को झुठला दिया जाए।” रमेश ने आरोप लगाया, “उनके (मोदी के) पद से हटने की निश्चितता ने अब उन्हें अपनी याददाश्त चले जाने का नाटक करने के लिए मजबूर कर दिया है।”

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