पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर महिलाएं

छोटा उदेपुर. जिले की कवांट तहसील के समलवांट गांव में नल से जल योजना अधूरी होने के कारण गर्मी आते ही पानी के लिए गांव मेंं हाहाकार मचने लगा है। गांव में पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करने को महिलाएं मजबूर हो रही हैं।
सरकार ने इस गांव में हैंडपंप, नलकूप, कुआं बनवाया है। नल से जल योजना का काम भी जारी है लेकिन यह योजना अधूरी है। 5000 की आबादी वाले गांव के लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकने की नौबत आ गई है। ग्रामीणों को जहां भी पानी मिले वहां जाकर पानी लेने को वे मजबूर हैं।गांव में लगभग 100 हैंडपंप-नलकूप, 15 कुएं, 2 मिनी टैंक और 1 बड़ा टैंक हैं। अधिकांश हैंडपंप-नलकूप में पानी बहुत गहरा है। 2 मिनी टंकियां भी बंद हालत में हैं। हाफेश्वर समूह योजना की बड़ी टंकी है, जिससे बहुत कम दबाव से पानी की सप्लाई होती है। इस टंकी को भरने में पूरा दिन लग जाता है, इसलिए इस टंकी से पानी मुश्किल से ही लोगों को मिल पाता है।
वर्तमान समय में जब गांव की महिलाएं हैंडपंप पर पानी भरने पहुंचती हैं तो जब हैंडपंप को कई बार हिलाने पर बमुश्किल ही पानी निकलता है और वह भी मुश्किल से दो बेड़े ही निकलता है। फिर कुछ देर तक पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है। कुछ मिनटों के बाद पानी उपलब्ध होता है। गांव में मवेशियों की आबादी मानव आबादी से अधिक है। ज्यादातर लोगों के घरों में मवेशी हैं और उनके लिए पानी का इंतजाम करना बहुत मुश्किल हो गया है। गांव में 12 फलिया हैं। पानी की समस्या तभी हल हो सकती है जब हर फलिया के लिए पानी की अलग-अलग टंकी बनाई जाए।
पानी की जरूरत
घर पर खाने का सब-कुछ है, लेकिन पानी की दिक्कत है, कहीं से पानी लाते हैं, हाथ-पैर दुखते हैं। हैंडपंप है, लेकिन वहां कतार में लगने पर पानी मिलता है। हमें पानी की जरूरत है।शांता राठवा, स्थानीय बुजुर्ग महिला
पानी की समस्या
हमारे गांव में ज्यादातर समय पानी की समस्या रहती है। हमने गांव में हैंडपंप लगवाए हैं। पानी जलस्तर से नीचे है। यहां की आबादी पांच हजार है, जबकि मवेशियों की संख्या छह हजार है।

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