
मुंबई। हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडियन और अभिनेता महमूद तथा महानायक अमिताभ बच्चन के रिश्ते कभी बेहद करीबी माने जाते थे। जब अमिताभ बच्चन संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे, तब महमूद ने उन्हें न केवल सहारा दिया बल्कि अपनी फिल्म “बॉम्बे टू गोवा” (1972) में मुख्य भूमिका देकर उनके करियर को नई दिशा दी। फिल्म इंडस्ट्री में महमूद को अमिताभ का सबसे बड़ा शुभचिंतक और “गॉडफादर” भी कहा जाता था।

लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई। मीडिया रिपोर्टों और महमूद के एक पुराने इंटरव्यू के अनुसार, 1993 में जब महमूद ब्रीच कैंडी अस्पताल में बायपास सर्जरी के बाद भर्ती थे, उसी दौरान अमिताभ बच्चन अपने पिता हरिवंश राय बच्चन को देखने रोज अस्पताल आते थे। महमूद का दावा था कि अमिताभ जानते थे कि वे भी उसी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनसे मिलने नहीं आए।

इंटरव्यू में महमूद ने भावुक होकर कहा था:
“अमिताभ ने साबित कर दिया कि असली बाप ही असली होता है, मैं तो नकली था।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमिताभ ने न तो मुलाकात की, न कोई शुभकामना संदेश भेजा और न ही एक फूल तक भिजवाया। इस घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा। बाद में कई मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि महमूद ने अमिताभ को “एहसान फरामोश” कहा था। हालांकि, इस शब्द को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न दावे हैं और इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि महमूद ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा था कि उन्होंने अमिताभ को माफ कर दिया था और उनके लिए कभी बुरा नहीं चाहा। वहीं, महमूद के निधन (2004) के बाद अमिताभ बच्चन ने सार्वजनिक रूप से उन्हें याद करते हुए स्वीकार किया कि महमूद ने उनके शुरुआती करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और “बॉम्बे टू गोवा” में पहला बड़ा अवसर दिया था।
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इस घटना का आधार महमूद के पुराने इंटरव्यू हैं। यह सत्य है कि उन्होंने अस्पताल वाली घटना का जिक्र किया था और उससे दुखी होने की बात कही थी। हालांकि “एहसान फरामोश” शब्द का दावा मुख्यतः मीडिया रिपोर्टों में मिलता है, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे अंतिम सत्य नहीं बल्कि मीडिया रिपोर्टों पर आधारित दावा माना जाना चाहिए।

जन कल्याण टाइम न्यूज़ | मुंबई

प्रस्तुति: मुंबई प्रेस फोटोग्राफर परेश पटेल
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