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    Home»Political»अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने पर पॉज… अमित शाह-नितिन नवीन और बीएल संतोष के साथ मीटिंग में क्या हुआ?
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    अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने पर पॉज… अमित शाह-नितिन नवीन और बीएल संतोष के साथ मीटिंग में क्या हुआ?

    जनकल्याण टाइमBy जनकल्याण टाइमJune 3, 2026Updated:June 3, 2026No Comments6 Mins Read
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    तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी छोड़ने का मौखिक संकेत दिया है, जिससे पार्टी और राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें जल्दबाजी न करने को कहा है.

    तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल के. अन्नामलाई को लेकर बड़ी राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक अन्नामलाई ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को मौखिक रूप से संकेत दिया है कि वह पार्टी छोड़ना चाहते हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल उन्हें ऐसा कोई कदम उठाने से रोकते हुए इंतजार करने को कहा है. इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति के साथ-साथ बीजेपी के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है.

    मंगलवार को हुई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक

    मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद यह मामला सामने आया. बताया जा रहा है कि अन्नामलाई ने इन बैठकों में तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी के कारण भी बताए. इसी दौरान उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के सामने पार्टी छोड़ने की इच्छा जाहिर की.

    अन्नामलाई ने अभी नहीं दिया है औपचारिक इस्तीफा

    सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई ने अभी तक औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है. उन्होंने केवल मौखिक रूप से नेतृत्व को अपनी मंशा से अवगत कराया है. पार्टी नेतृत्व उनके फैसले से सहमत नहीं है और चाहता है कि वह जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और चर्चा के बाद उन्हें जवाब दिया जाएगा. माना जा रहा है कि अन्नामलाई बुधवार तक दिल्ली में ही रह सकते हैं.

    पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई पिछले कुछ वर्षों में तमिलनाडु में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे थे. उन्होंने न केवल पार्टी की पहचान को मजबूत किया, बल्कि राज्य में बीजेपी के संगठनात्मक विस्तार में भी अहम भूमिका निभाई. उनकी आक्रामक राजनीति, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और जमीनी स्तर पर सक्रियता ने उन्हें तमिलनाडु में एक अलग पहचान दिलाई.

    पार्टी नेतृत्व ने कई जिम्मेदारियों की पेशकश की

    सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें कई विकल्प और जिम्मेदारियां देने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन अन्नामलाई ने उनमें खास रुचि नहीं दिखाई. बताया जा रहा है कि वह एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं. उनके करीबी लोगों का मानना है कि प्रस्तावित राजनीतिक मंच राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाएगा और तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में खुद को पेश करेगा.

    अन्नामलाई और बीजेपी नेतृत्व के बीच मतभेदों की जड़ तमिलनाडु में पार्टी की बदलती राजनीतिक रणनीति को माना जा रहा है. वर्ष 2021 से 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अन्नामलाई ने बीजेपी को एक स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई थी. उनका मानना था कि क्षेत्रीय दलों के सहारे आगे बढ़ने के बजाय बीजेपी को अपने दम पर राज्य में मजबूत होना चाहिए.

    कैसे बीजेपी से दूर होते गए अन्नामलाई?

    उनके नेतृत्व में बीजेपी ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों पर लगातार हमले किए. भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया और व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाए गए. इसका असर भी दिखाई दिया. 2019 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में बीजेपी का वोट शेयर जहां 3.6 प्रतिशत था, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 11.2 प्रतिशत तक पहुंच गया. यह राज्य में बीजेपी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना गया. हालांकि पार्टी कोई सीट जीतने में सफल नहीं हुई और खुद अन्नामलाई भी कोयंबटूर सीट से चुनाव हार गए.

    इस चुनावी नतीजे के बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के भीतर यह धारणा मजबूत हुई कि तमिलनाडु में बिना किसी मजबूत क्षेत्रीय सहयोगी के पार्टी के लिए बड़ी सफलता हासिल करना मुश्किल होगा. इसी सोच के तहत बीजेपी ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एआईएडीएमके के साथ अपने पुराने गठबंधन को फिर से जीवित करने का फैसला किया.

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही फैसला अन्नामलाई और पार्टी नेतृत्व के रिश्तों में दूरी बढ़ने की शुरुआत बना. अप्रैल 2025 में अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई. उस समय भी माना गया था कि एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ रिश्ते सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया. अन्नामलाई समर्थकों का दावा रहा है कि एआईएडीएमके नेतृत्व उन्हें गठबंधन में सबसे बड़ी बाधा मानता था और उनकी विदाई के बाद ही दोनों दलों के संबंध सामान्य हो सके.

    इसके बाद 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में जूनियर पार्टनर के रूप में चुनाव लड़ा. पार्टी को एक सीट तो मिली, लेकिन उसका वोट शेयर 11 प्रतिशत से गिरकर 3 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया. इस प्रदर्शन ने बीजेपी के भीतर गठबंधन रणनीति की प्रभावशीलता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए.

    तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष भी पहुंच सकते हैं दिल्ली

    सूत्रों के मुताबिक अन्नामलाई का मानना है कि गठबंधन की राजनीति में लौटकर बीजेपी ने तमिलनाडु में स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति बनने के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को कमजोर किया. इसके अलावा पार्टी द्वारा द्रविड़ राजनीतिक परंपरा के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाने से भी उनकी असहजता बढ़ी.

    अन्नामलाई के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन के भी दिल्ली पहुंचने की संभावना है. माना जा रहा है कि वह पार्टी नेतृत्व के साथ बैठक कर मौजूदा स्थिति पर चर्चा करेंगे और अन्नामलाई को मनाने के प्रयासों का हिस्सा बनेंगे.

    फिलहाल बीजेपी नेतृत्व उम्मीद कर रहा है कि अन्नामलाई को पार्टी में बने रहने के लिए राजी कर लिया जाएगा. पार्टी के भीतर यह स्वीकार किया जा रहा है कि यदि अन्नामलाई अलग रास्ता चुनते हैं तो यह तमिलनाडु में बीजेपी की दीर्घकालिक राजनीतिक योजनाओं के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अन्नामलाई पार्टी में बने रहते हैं, नई पार्टी बनाते हैं या फिर कोई तीसरा राजनीतिक रास्ता चुनते हैं. उनका अगला कदम तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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