झोपड़पट्टी में बीता बचपन, आज करोड़ों का मालिक एक्टर, 26 साल बाद पूरा किया पिता का सपना

सिद्धार्थ जाधव पिछले दो दशकों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा दोनों में अपनी एक खास पहचान बनाई है. हाल ही में एक इंटरव्यू में एक्टर ने अपने बचपन को याद किया. सिद्धार्थ का बचपन एक झोपड़पट्टी में बीता था. अब उन्होंने अपने माता-पिता का घर खरीदने का सपना पूरा कर दिया है

द मैशेबल इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ जाधव ने बताया, ‘मैं झोपड़पट्टी में रहता था. वो पूरा झोपड़पट्टी का ही इलाका था. वहां एक स्टेज था, फिर छोटी-छोटी गलियां थीं. हमारे इलाके में सभी त्योहार बहुत धूमधाम से मनाए जाते थे. हम प्रोजेक्टर पर फिल्में देखा करते थे. गणेश चतुर्थी के 11 दिनों में हर दिन एक फिल्म दिखाई जाती थी

एक्टर ने फिर एक यादगार पल को याद किया जब पूरा मोहल्ला अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘तेजाब’ साथ में देख रहा था. उन्होंने कहा, ‘एक दिन तेजाब चल रही थी और सभी बच्चे सामने बैठे थे. जब माधुरी का एक, दो, तीन गाना आया तो लोग प्रोजेक्टर की तरफ सिक्के फेंकने लगे. हमने वे सिक्के इकट्ठा किए और अपनी टिकट का पैसा वापस निकाल लिया. वो प्रोजेक्टर स्क्रीन कुछ और ही लेवल की थी

सिद्धार्थ ने आगे बताया, ‘हम खाना जल्दी खा लेते थे और फिर फिल्म के लिए जगह रिजर्व करने के लिए बोरा लेकर बैठ जाते थे. मेरे परिवार वाले मुझे पहले भेजते थे जगह बचाने के लिए, और बाद में खुद आते थे. रात में फिल्म दिखाने के लिए कोई एक शख्स स्ट्रीट लाइट पर चढ़कर उसे ऑन कर देता था, ताकि सब लोग आराम से फिल्म देख सकें. आज आप मोबाइल पर फिल्म देख सकते हो.’

बातचीत के दौरान सिद्धार्थ जाधव ने अपने बचपन के सपने को भी याद किया. उन्होंने कहा कि वो पुलिस अधिकारी बनना चाहते थे. एक्टर ने कहा, ‘मेरे पिता अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के रूप में काम करते थे. मैं पुलिस फोर्स में जाना चाहता था, क्योंकि उस इलाके में मेरे सारे दोस्तों के पिता पुलिस वाले थे.’

मुंबई के दादर से ताल्लुक रखने वाले सिद्धार्थ जाधव ने यह भी बताया कि आखिरकार उन्होंने अपने माता-पिता के लिए उसी इलाके में घर खरीदकर अपना बचपन का सपना पूरा कर लिया. इस सपने को पूरा करने में एक्टर को 26 सालों का लंबा वक्त लगा.

उन्होंने कहा, ‘दादर में रहना मेरा सपना था, वो जगह जहां हम पैदा हुए और बड़े हुए. हम पिता के दोस्त के घर में रहते थे, वो घर हमारा अपना नहीं था. मैं चाहता था कि वहां मेरा अपना घर हो. मैंने ये सपना 26 साल बाद पूरा किया. मैं अपने माता-पिता के लिए घर खरीदना चाहता था और अपने पिता की नेमप्लेट लगते हुए देखना चाहता था. मेरा एक सपना तो पूरा हो गया और मेरे पिता बहुत खुश थे.’

प्रोजेक्ट्स की बात करें तो सिद्धार्थ जाधव मराठी सिनेमा में एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट्स में धूम मचा रहे हैं. उन्हें हाल ही में साइलेंट फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ में देखा गया था. इसके अलावा इन दिनों उनकी सीरीज ‘मटका किंग’ भी अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है.

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