
बसपा सुप्रीमो मायावती ने धार्मिक आयोजनों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे विवाद, तनाव और संघर्ष बढ़ रहे हैं। प्रयागराज स्नान विवाद इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने संविधान की भावना के अनुरूप धर्म और राजनीति को अलग रखने की अपील की।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी धर्म के पर्व, त्योहार, पूजापाठ, स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप एवं प्रभाव पिछले कुछ वर्षों से बढ़ा है। यह नए विवाद, तनाव व संघर्ष का कारण बन रहा है, जो सही नहीं है। इससे लोगों का दुखी और चिंतित होना स्वाभाविक है।
बसपा सुप्रीमो ने शनिवार को जारी अपने बयान में कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति तथा राजनीति को धर्म से जोड़ने के खतरे हमेशा बने रहते हैं। प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा विवाद, एक-दूसरे का अनादर व आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा़ उदाहरण है। इससे हर हाल में बचना ही बेहतर होगा। देश का संविधान व कानून ईमानदारी से जनहित व जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानकर राजनीति को धर्म से तथा धर्म को राजनीति से दूर रखता है।
जिस पर सही नीयत व नीति से अमल हो ताकि राजनेता अपना संवैधानिक दायित्व बिना किसी द्वेष व पक्षपात के सर्वसमाज के सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हित में ईमानदारी व निष्ठापूर्वक निभा सकें। वर्तमान हालात में भी लोगों की यही अपेक्षा है। लिहाजा प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितना जल्द सुलझ जाए, उतना बेहतर होगा। इसके अलावा बसपा सुप्रीमो ने प्रदेशवासियों को ’उत्तर प्रदेश दिवस’ की बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी हैं।