हार-जीत का मंथन करेंगे भाजपा-कांग्रेस

मंडी। जिले के छह शहरी निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल हार-जीत का मंथन करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले मंडी में कई निकायों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के बेहतर प्रदर्शन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, भाजपा भी उन वार्डों और निकायों का फीडबैक जुटाने में लग गई है, जहां अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।

भाजपा संगठन अब यह जानने का प्रयास कर रहा है कि किन क्षेत्रों में मतदाताओं की नाराजगी सामने आई और किन स्थानीय कारणों का असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि कई जगह स्थानीय गुटबाजी, टिकट वितरण और वार्ड स्तर की नाराजगी चुनाव में असर डाल गई। खासकर उन निकायों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की बढ़त ने भाजपा को रणनीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के प्रदर्शन से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। कांग्रेस इसे सरकार की नीतियों और स्थानीय मुद्दों पर जनता के समर्थन के रूप में देख रही है। पार्टी नेता अब इस प्रदर्शन को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहरी निकाय चुनावों के परिणामों ने यह संकेत जरूर दिया है कि मंडी जिले की राजनीति में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ भी निर्णायक भूमिका निभा रही है। ऐसे में दोनों दल आने वाले समय में संगठनात्मक मजबूती और जनसंपर्क बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर ने कहा कि शहरी निकाय चुनाव में मतदाताओं ने आशीर्वाद दिया है। खामियों के बारे में मंथन कर कारणों का पता लगाया जाएगा। भाजपा मंडी जिला अध्यक्ष निहाल चंद ने बताया कि संगठन अपने स्तर पर स्थिति पर मंथन करेगा।

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