मुंबई क्राइम ब्रांच का अफसर बता बुजुर्ग से ऐंठ ली 7 लाख 50 हजार रुपये …

मुंबई : खुद को मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर सेंट्रल दिल्ली के प्रसाद नगर इलाके के बुजुर्ग से 7 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। पीड़ित ने जब मुंबई पुलिस के असली डीसीपी का नंबर खोजा तो उनसे हुई बातचीत के बाद फ्रॉड का खुलासा हुआ। पीड़ित ने सेंट्रल जिला साइबर थाना पुलिस से शिकायत की, जिसने शुरुआती जांच के बाद शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस रकम जिन खातों में ट्रांसफर हुई है, उन्हें खंगाल रही है।

पुलिस अफसरों ने बताया कि प्रसाद नगर इलाके में रहने वाले 73 साल के बुजुर्ग को 8 नवंबर की सुबह 9:11 बजे एक कॉल आई। अमेरिकी ट्रांसपोर्ट कंपनी फेडेक्स से होने का दावा करने वाले ने कहा कि आपके नाम से ताइवान के लिए एक पार्सल भेजा गया था। इसके भीतर छह पासपोर्ट, छह क्रेडिट कार्ड और 140 ग्राम एडीएमए ड्रग्स है।

बुजुर्ग ने कहा कि कोई पार्सल नहीं भेजा है। कॉलर ने मुंबई के शिशिर मित्रा के नाम से भेजे पार्सल में उनका फोन नंबर और आधार कार्ड नंबर होने का दावा किया। कॉलर ने मुंबई क्राइम ब्रांच से हॉटलाइन पर कॉल कराने की बात कही, तो वो राजी हो गए। दूसरी तरफ से अंधेरी मुंबई क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार गुंटु होने का दावा करते हुए एक शख्स बात करने लगा।

इसने डीसीपी से स्टैंड क्लियर करने को कहा। वॉट्सऐप पर विडियो कॉल से बात होने लगी। इसकी डीपी पर मुंबई पुलिस का लोगो था। एक फोटो दिखाते हुए कहा गया कि ये जेल में बंद महाराष्ट्र के एक पूर्व मंत्री हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग में कस्टडी में हैं। इनसे आपका क्या रिश्ता है?

खुद को डीसीपी बालसिंग राजपूत बताने वाले ने दावा किया कि उनके आधार नंबर से मुंबई के चार बैंक खाते लिंक हैं। बुजुर्ग ने पहचान बताने को कहा तो उसने मुंबई पुलिस की आईडी भेज दी। फिर वॉट्सऐप पर दो लेटर शेयर किए। एक में सीबीआई की एफआईआर और दूसरा आरबीआई की मनी लॉन्ड्रिंग में उनका नाम पूर्व मंत्री के साथ जोड़ा गया था।

दोनों में डीसीपी के साइन थे। इसके बाद ठगी का सिलसिला शुरू हुआ और दो बार में 7 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पीड़ित ने इंटरनेट पर मुंबई पुलिस के नंबर चेक किए तो डीसीपी का नंबर दूसरा था। इस पर कॉल किया तो उन्हें ठगी का पता चला।

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