

राजेश लक्ष्मण गावड़े
मुख्य संपादक (जन कल्याण टाइम)
“कभी रिश्तों में बातें होती थीं, अब नोटिफिकेशन चेक होते हैं।
चैट में दिखता है इश्क़, पर असल में नजरें चुराई जाती हैं।”
📱 दृश्य परिवर्तन:
एक लड़की अपने बॉयफ्रेंड को इंस्टाग्राम पर टैग करती है, लेकिन जब सामने मिलती है, तो नज़रें तक नहीं मिलाती।
🗣️ B. Ashish:
“रिश्तों की गहराई अब स्टेटस से नापते हैं।
क्या वो online है? क्या उसने seen किया?
यही बन गया है अब प्यार का पैमाना?”
💔 दृश्य:
एक लड़का अकेले बैठा है, दिल टूटा हुआ है… उसके पोस्ट पर 200 लाइक्स हैं, लेकिन कोई हाल नहीं पूछता।
🗣️ B. Ashish:
“सच्चे जज़्बात भी अब लाइक्स पर बिक जाते हैं।
जो दिल से निकले वो emotion,
अब filter में छुपा के पोस्ट किया जाता है।”
📲 दृश्य:
दोनों दोस्त एक-दूसरे से नाराज़ हैं, पर स्टोरी पर एक-दूसरे को quote में मारते हैं।
🗣️ B. Ashish:
“अब रूठने पर कॉल नहीं आता,
स्टोरी में indirect डाल दी जाती है।
और हम समझते हैं… शायद उसे फर्क पड़ता है।”
🎭 भावनात्मक मोड़:
B. Ashish कैमरे की ओर देखकर कहता है:
🗣️ B. Ashish (सिर्फ़ कैमरे की तरफ़ देखकर, गम्भीर भाव से):
“रिश्ते कोई app नहीं हैं… जो अपडेट करने पड़ें।
ये दिल की connection होते हैं… WiFi से नहीं, वक़्त से जुड़ते हैं।
तो अगर कोई अपना है…
तो चैट में नहीं, चाहत में दिखाओ।
लाइक्स नहीं चाहिए दोस्त…
समझ चाहिए, समय चाहिए, और सच्ची बात चाहिए।”
🎶 संगीत के साथ समापन (End Scene with Music):
धीमी पियानो की धुन के साथ स्क्रीन पर शब्द उभरते हैं:
📝 “इश्क़ डिजिटल नहीं होता,
वो तो आंखों से बयां होता है।
थोड़ा वक्त दो, थोड़ा पास आओ,
शब्दों से नहीं… दिल से निभाओ।”
🎬 End Credits:
🎙️ Voice & Concept: B. Ashish
🎥 DOP: Paresh Patel
🖊️ Script: Rajesh Laxman Gavade
🎞️ Presented by: RLG PRODUCTION
📢 Message: “सच्चे रिश्ते ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन जीते जाते हैं।”
