पालघर जिले के ३० गांव में श्मशान नहीं! …बारिश में कोई स्वर्ग न सिधारे लोग करते हैं प्रार्थना

पालघर
पालघर में विकास के तमाम दावे सरकार भले ही करती हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी बदहाली बरकरार है, जिसकी वजह से जनता जीते जी तो परेशानियां झेल रही है, लेकिन मरनेवालों को भी चैन नहीं है। शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते क्या मुर्दा, क्या जिंदा सभी परेशान हैं। पालघर जिले के ३० ऐसे गांव हैं जहां श्मशान न होने के कारण लोग खुले में चिता जलाते हैं। गर्मी, सर्दी के मौसम में तो शवदाह में ज्यादा परेशानी नहीं होती है, लेकिन बरसात हो और ऐसे में कोई स्वर्ग सिधार जाए तो उसका दाह संस्कार करना मुश्किल होता है। लोग प्रार्थना करते हैं कि बारिश के मौसम में कोई स्वर्ग न सिधारे।
जहां श्मशान भूमि है, वहां भी अंतिम संस्कार के लिए बने श्मशान खुद ही मृत अवस्था में पड़े हैं। कई जगहों पर श्मशान जर्जर पड़े हैं, कहीं छत गायब है तो कहीं पहुंचने के लिए रास्ता खस्ताहाल अवस्था में है। कई जगहों पर तो श्मशान भूमि तक पहुंचने के लिए मार्ग ही नहीं है। जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि जिन गांवों में श्मशान भूमि नही है वहां वन विभाग से जमीन की मंजूरी मिलने के बाद श्मशान को निर्माण करवाया जाएगा।
पालघर जिले के आठ तालुकाओं में कुल ९०४ गांव हैं, जिनमें से पालघर, वाडा, वसई के ३० गांवों की ग्राम पंचायतों को अब तक श्मशान भूमि के लिए जगह नहीं मिल सकी है। पालघर जिले के तलासरी तालुका में ४१ गांव हैं। यहां के सभी ४१ गांवों में श्मशान भूमि है, दहानू तालुका में कुल १७४ गांव हैं और सभी १७४ गांवों में श्मशान होने का दावा किया जाता है, लेकिन यहां के कई इलाकों के लोगों को आज भी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। मोखाड़ा तालुका में ५६ गांव हैं, यहां के सभी गांवों में शमशान भूमि हैं वसई तालुका में ४९ गांव हैं और यहां के आठ गांवों में श्मशान नहीं हैं। वाडा तालुका में १६८ गांव हैं और १६० गांवों में ही श्मशान भूमि है। विक्रमगढ़ तालुका में ९३ गांव हैं और यहां के सभी गांवों में श्मशान भूमि है। जव्हार तालुका में १०७ गांव हैं यहां के सभी गांवों में श्मशान भूमि है। पालघर तालुका में २१५ गांव हैं और सिर्फ २०१ गांवों में ही श्मशान भूमि है। यहां के ११ गांवों को आज तक श्मशान भूमि नहीं मिल सकी है। वसई तालुका के अर्नाला, मेढे, वडघर, आंबोडे, वारसई, तरखड, आक्टर और पाली आदि में आठ जगहों पर श्मशान भूमि नहीं है। वाडा तालुका के वीजापुर सोनाले बुद्रुक, किरवली, रायघल, मुंगूस्ते, लखमापूर और वर्धा सहित आठ गांवो में भी श्मशान भूमि नहीं है।

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