
शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए, जबकि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में तेजी दिखी
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में सुस्ती का माहौल रहा। मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार में अस्थिरता देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।
सेंसेक्स और निफ्टी के अंतिम आंकड़े क्या रहे
कारोबार के अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 249.70 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 76,478.67 के स्तर पर बंद हुआ।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 80.50 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,865.75 पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी 23,900 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया है।
बाजार पर किस सेक्टर का रहा दबाव और कहां दिखी तेजी?
बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ा दबाव आईटी सेक्टर से आया, जिसमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस, आईटीसी, एचसीएल टेक, टीसीएस और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
दूसरी ओर, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर इंडेक्स 1.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप सेक्टोरल गेनर रहा। इसके बाद निफ्टी केमिकल्स (1.42 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (1.31 प्रतिशत) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.16 प्रतिशत) का स्थान रहा। बीएसई पर मारुति, टाइटन, बजाज फाइनेंस, इटरनल, अडानी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, इंडिगो, ट्रेंट और एनटीपीसी प्रमुख रूप से लाभ में रहे।
सोमवार को दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता में सुधार और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के मकसद से अपनी नई ईवी पॉलिसी की घोषणा की थी। इस पॉलिसी का सीधा असर मंगलवार को ईवी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। ओला इलेक्ट्रिक का शेयर 8.37 प्रतिशत उछलकर 43.76 रुपये पर बंद हुआ, जबकि एथर एनर्जी का शेयर 5.24 प्रतिशत चढ़कर 1,140.55 रुपये पर पहुंच गया।
इसके विपरीत, पारंपरिक ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। आयशर मोटर्स में 4.38 प्रतिशत, भारत फोर्ज में 0.96 प्रतिशत और हीरो मोटोकॉर्प में 0.30 प्रतिशत की गिरावट आई, हालांकि टाटा मोटर्स और बॉश के शेयरों में मामूली बढ़त दर्ज की गई।
रुपये की चाल और एक्सपर्ट्स का बाजार पर क्या है नजरिया?
मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.66 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर 94.54 के मुकाबले कमजोर है। हालांकि, मार्च 2025 के बाद यह रुपये की पहली तिमाही दर तिमाही बढ़त है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, डॉलर की मजबूत कॉरपोरेट मांग और सेफ-हेवन प्रवाह के कारण लगातार तीसरे सत्र में रुपये में गिरावट आई है।
बाजार के मौजूदा हालात पर मार्केट एनालिस्ट विपिन डिक्सेना का कहना है कि निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ है और मुनाफावसूली के कारण धारणा सतर्क हो गई है, लेकिन यह केवल एक कंसोलिडेशन (एकीकरण) का चरण है, न कि कोई ट्रेंड रिवर्सल (रुझान में बदलाव)। उनका मानना है कि गिरते बाजार में भी ईवी शेयरों का मजबूत प्रदर्शन निवेशकों के दीर्घकालिक भरोसे को दर्शाता है। डिक्सेना के अनुसार, अर्थव्यवस्था की मैक्रो कहानी अभी भी बरकरार है और बाजार की धारणा को अगली तेजी से पहले सेटल होने के लिए 1-2 सत्रों की आवश्यकता है।
मंगलवार का बाजार यह स्पष्ट करता है कि प्रमुख सूचकांकों में भले ही सुस्ती हो, लेकिन निवेशकों का रुझान विशिष्ट पॉलिसी-संचालित सेक्टर्स जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों की तरफ मजबूती से बना हुआ है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों और अगले कुछ सत्रों में बनने वाली धारणा पर निर्भर करेगी।