pm modi Mumbai Visit: देश के सबसे लंबे समुद्री पुल ‘अटल सेतु’ के बाद अब समुद्र के अंदर बनी देश की पहली सड़क शुरू होने वाली है। मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने घोषणा की कि प्रिंसेस स्ट्रीट (मरीन ड्राइव) से बांद्रा वर्ली सी लिंक के दक्षिणी छोर तक महत्वाकांक्षी मुंबई कोस्टल रोड परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों मुंबई कोस्टल रोड के पहले चरण का उद्घाटन 19 फरवरी को किया जाएगा।
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बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के मुताबिक, 40 फीट चौड़ी कोस्टल रोड की लंबाई 10.58 किमी है। जिसका 9 किमी हिस्सा दक्षिण मुंबई में है। इस परियोजना के तहत दो बड़ी सुरंगें खोदी गईं है। कोस्टल रोड के सुरंग बनाने का काम 11 जनवरी 2021 को शुरू हुआ। पहली सुरंग की खुदाई 10 जनवरी 2022 को पूरी हुई। दूसरी सुरंग की खुदाई 1 अप्रैल 2022 से शुरू की गई थी।
निर्माण में आईं कई दिक्कतें
दूसरी सुरंग की खुदाई के दौरान तकनीकी समस्या हुई और सुरंग की खुदाई में देरी हुई। सुरंग का काम भारत के सबसे बड़े टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन की मदद से कोस्टल रोड बनाया गया है। बीएमसी के मुताबिक, मुंबई कोस्टल रोड के दोनों चरण 15 मई तक शुरू हो जाएंगे।
मुंबई कोस्टल रोड का काम अक्टूबर 2018 में शुरू किया गया था। यह परियोजना बहुत बड़ा और जटिल होने के कारण कई दिक्कतें आईं। अदालती रोक और अन्य कारणों की वजह से परियोजना की डेडलाइन बार-बार बढ़ाई गई।
मुंबई कोस्टल रोड की खासियत-
मुंबई शहर के यातायात को बेहतर करने की दृष्टि से यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। छत्रपति संभाजी महाराज के नाम से जाना जायेगा मुंबई कोस्टल रोड। इससे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां चल सकती हैं। हालांकि, इस पर गति सीमा 70 से 80 किमी प्रति घंटा होने की खबर है।
कोस्टल रोड के दोनों सुरंगों में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में धुआं बाहर निकल जाएगा। कोस्टल रोड से ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगी। इससे सफर करने पर उतनी ही दूरी में लगने वाले समय में काफी बचत होगी। दावा जा रहा है कि ईंधन में भी 34 फीसदी की बचत होगी।
मालूम हो कि मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित मुंबई ट्रांस-हार्बर लिंक (एमटीएचएल) ब्रिज यानी अटल सेतु पिछले महीने यातायात के लिए खुला। एमटीएचएल ब्रिज का शुभारंभ 12 जनवरी को पीएम मोदी ने किया था। 18 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना छह लेन वाला यह ब्रिज 21.8 किमी लंबा है। इसका 16.5 किमी हिस्सा समुद्र में और 5.5 किमी जमीन पर है।
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