नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिना व्यापक परामर्श के एक और संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने परिसीमन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए 17 अप्रैल को लोकसभा में परिसीमन संबंधी विधेयक के गिरने का हवाला दिया। उस समय सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। खरगे ने अपने पत्र में 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को लिखे पत्रों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 14 अप्रैल की देर रात विधेयकों को सार्वजनिक किया और दो दिन बाद संसद का विशेष सत्र बुलाने से पहले विपक्षी दलों से कोई व्यापक चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा कि नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित पक्षों को विचार-विमर्श का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

64 दिन बाद भी संसद का सत्रावसान नहीं
खरगे ने मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी को भी अभूतपूर्व बताते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था, लेकिन 64 दिन बीतने के बावजूद लोकसभा और राज्यसभा का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस देरी पर स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। पार्टी का कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पर व्यापक सहमति के बिना आगे बढ़ने के बजाय सरकार को सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर उनकी राय लेनी चाहिए।