Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज के ‘कलयुगी’ बेटे और बहू को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। शहर में रह रहे बूढ़े माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बेटे-बहू को घर छोड़कर जाने का आदेश दिया है। इससे पहले पनवेल के सीनियर सिटीजन ट्राइब्यूनल ने भी ऐसा ही आदेश पारित किया था। लेकिन इसके बावजूद पीड़ित माता-पिता को इंसाफ नहीं मिला तो उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के बेटे और उसकी पत्नी को नवी मुंबई के खारघर स्थित फ्लैट का कब्जा उन्हें सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही बुजुर्ग दंपत्ति को भरण-पोषण के लिए हर महीने एक निश्चित राशि देने का भी फैसला सुनाया है। 70 साल के बुजुर्ग दंपत्ति का आरोप है कि संपत्ति विवाद के चलते उनका बेटा और बहू उनके साथ दुर्व्यवहार और प्रताड़ित करते थे।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस फिरदोश पूनीवाला ने 22 जनवरी के आदेश में कहा है कि यदि बेटा और बहू याचिकाकर्ताओं को फ्लैट का कब्जा नहीं सौंपते हैं तो पुलिस की मदद ली जा सकती है।
बुजुर्ग माता-पिता ने अपनी याचिका में कहा है कि उत्पीड़न की उनकी शिकायत पर ट्रिब्यूनल ने 6 जून 2022 को उनके बेटे-बहू को फ्लैट खाली करने और बेटे को अपने माता-पिता को 5,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था। हालाँकि, बेटे-बहू ने आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भी उनका सहयोग नहीं किया।
न्यायाधीशों ने कहा कि पर्याप्त नोटिस के बावजूद युवा कपल उपस्थित नहीं हुआ। राज्य के वकील ने 22 जनवरी को खारघर पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) और ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी से प्राप्त जानकारी कोर्ट को बताई।
What's Hot
Related Posts
Add A Comment
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
