Kalaram temple: पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को महाराष्ट्र दौरे के दौरान नासिक जिले में स्थित ऐतिहासिक कालाराम मंदिर पहुंचे. मंदिर में दर्शन करने के बाद उन्होंने पूजा-अर्चना की और स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया. पीएम मोदी मंदिर परिसर में पोछा लगाते हुए नजर आए. पीएम मोदी ने देशभर के मंदिरों में स्वच्छता अभियान चलाने का आह्वान किया है. पीएम मोदी स्वच्छता चलाने का अभियान उस मंदिर से किया है, जहां से आज से करीब 100 साल पहले दलितों के मसीहा और संविधान के निर्माता डॉ अबंडेकर ने छुआछूत के खिलाफ मंदिर में सत्याग्रह आंदोलन चलाया था.
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना उद्धव ठाकरे के प्रमुख उद्धव ठाकरे भी 22 जनवरी को कालाराम मंदिर जाने वाले हैं. पीएम मोदी और उद्धव ठाकरे के कालाराम मंदिर दौरे के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. लोकसभा चुनाव सिर पर है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं. ऐसे में संभावना है कि इन दोनों नेताओं के कालाराम मंदिर के दौरे से हिंदुत्व एजेंडा मजबूत होगा. साथ ही साथ दलितों को संदेश देकर नई सोशल इंजीनियरिंग करने की कवायद की है.
पीएम मोदी के कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना के मायने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नासिक का दौरा किया. स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर नासिक में राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन किया गया था. इसी पृष्ठभूमि में नासिक के कालाराम मंदिर के पुजारी और महंत सुधीरदास महाराज ने पीएम मोदी को यह निमंत्रण दिया था. पीएम मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार किया और ऐतिहासिक कालाराम मंदिर आकर राम के दर्शन किये. इस मौके पर उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की. आरती भी की गई. इसके बाद पीएम मोदी रामकुंड भी गये.
पीएम मोदी कालाराम मंदिर जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं. अयोध्या में 22 जनवरी को रामलाल के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इस अवसर पर पीएम मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और प्राण प्रतिष्ठा में हिस्सा लेंगे. इस पृष्ठभूमि में पीएम मोदी का नासिक दौरा काफी अहम माना जा रहा है. इस मौके पर ऐसा लग रहा है कि बीजेपी अपनी छवि कट्टर हिंदुत्ववादी के तौर पर बना रही है. कहा जा रहा है कि इसी वजह से पीएम मोदी ने नासिक का दौरा किया.
पीएम मोदी के नासिक दौरे से क्यों उद्धव हैं बेचैन?
जिस कालाराम मंदिर में डॉ अंबेडकर ने सत्याग्रह आंदोलन चलाया था. उसी जगह से पीएम मोदी ने कई सियासी संदेश देने की कोशिश की है. एक तरफ तो हिंदुत्व वोट को एकजुट करने का दांव चला है और राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पहले 11 दिनों का व्रत-अनुष्ठान करने का ऐलान किया है. उन्होंने कालाराम मंदिर में माथा टेक कर दलितों को बांधने की भी कवायद की है. महाराष्ट् में तीन महीने के बाद लोकसभा चुनाव होने हैं. और उसके बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं. पीएम मोदी ने नासिक के जरिए एक तरह से लोकसभा और विधानसभा चुनाव का आगाज भी कर दिया है. राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पहले कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना से उद्धव ठाकरे के उस कालाराम मंदिर अभियान को मंद करने की कोशिश की है, जिसमें राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन जाने वाले हैं. महाराष्ट्र की सियासी में दलित एक बड़ा वोट बैंक है, जो किसी भी राजनीतिक दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है. उसे भी पीएम मोदी ने सियासी संदेश दे दिया है.
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Kalaram temple:पीएम मोदी के कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना से क्यों परेशान उद्धव ठाकरे?
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