
नवसारी। देश के अन्य राज्यों की तरह गुजरात में भी कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो आज लगातार दूसरे दिन कोरोना के नए मरीजों के मामले में गुजरात देश में चौथे नंबर पर है। पिछले 24 घंटों में 9 नए मामले सामने आए हैं और इस तरह राज्य में कुल सक्रिय मामलों की संख्या 32 हो गई है। गांधीनगर जिले में गुरुवार को 8 साल के बच्चे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। यह बच्चा हाल ही में दक्षिण भारत की यात्रा से लौटा है। इसी बात को ध्यान में रखकर एडवोकेट कानू भाई सुखाड़िया ने अपील की है कि सभी लोगों को जहां आवश्यक हो वहां मास्क पहनना चाहिए, बार-बार हाथ धोना चाहिए और कोरोना नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि इस सम्बन्ध में उचित दिशानिर्देश जारी करें।
कब सामने आया जेएन.1 का पहला मामला?
कोविड-19 का यह सब-वैरिएंट सबसे पहले लक्जमबर्ग में मिला था। यह ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट से आया है। इसका सोर्स पिरोला वैरायटी BA.2.86 है। इसमें स्पाइक प्रोटीन आल्टरेशन हैं जो इसे अधिक संक्रामक और इम्यून सिस्टम को चकमा देने वाला बना देते हैं। जहां तक भारत का सवाल है तो जेएन.1 का पहला मामला 8 दिसंबर को सामने आया था। केरल में 79 साल की एक बुजुर्ग महिला इससे संक्रमित हुई थी।
कहां-कहां फैल चुका है जेएन.1 वैरिएंट?
कोरोना यह नया वैरिएंट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण में बढ़ोतरी का कारण बन रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, नीदरलैंड और हाल ही में चीन सहित अलग-अलग देशों में इसकी मौजूदगी मिली है। अब इस फेहरिस्त में भारत का नाम भी जुड़ गया है।
कैसी है जेएन.1 से संक्रमित मरीजों की हालत?
वीके पॉल ने बताया है कि संक्रमण की चपेट में आए लोगों में से लगभग 91 से 92 फीसदी लोग घर पर ही ट्रीटमेंट का ऑप्शन चुन रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जेएन.1 के नए मामलों में से 19 मामले गोवा में दर्ज किए गए हैं। केरल और महाराष्ट्र में एक-एक मामला सामने आया है। बीते दो सप्ताह में कोविड-19 से जुड़े 16 मरीजों की मौत हो गई। इन्हें गंभीर को-मॉर्बिडिटी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने बताया है कि भले ही कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन 92.8 फीसदी मामलों में घर पर ही इलाज हो रहा है जो हल्की बीमारी का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई है। जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उन्हें अन्य बीमारियां थीं और उनमें कोविड का पता अचानक लगा।
क्या JN.1 अन्य कोरोना वैरिएंट से ज्यादा संक्रामक या गंभीर है?
JN.1 BA.2.86 से जुड़ा है जो ओमिक्रॉन का एक वंशज है। पिछले साल गर्मियों में इसके कारण कोरोना के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों वैरिएंट लगभग एक जैसे हैं। उनके स्पाइक प्रोटीन में बहुत मामूली अंतर है। स्पाइक प्रोटीन वायरस का वह हिस्सा होता जो इसे मानव कोशिकाओं पर आक्रमण करने की इजाजत देता है। नया वैरिएंट इम्यून सिस्टम को चकमा देने में ज्यादा असरदार है। इसका मतलब है कि इंफेक्शन होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
कोविड वैरिएंट JN.1 के लक्षण क्या हैं?
कोरोना के नए वैरिएंट जेएन.1 के लक्षणों में ये चीजें शामिल हैं:
बुखार
थकान
नाक बहना
गले में खराश
सिरदर्द
खांसी
कंजेशन
जेएन.1 पर मौजूदा वैक्सीन कितनी असरदार?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करने वाली वैक्सीन जेएन.1 वैरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी रहनी चाहिए। इसका मतलब यह हुआ है कि मौजूदा वैक्सीन जेएन.1 वैरिएंट के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगी। यहीं कारण है कि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि घबराने की बहुत जरूरत नहीं है। लेकिन, स्थितियों पर नजर जरूर रखना होगा।
