संविधान की दुहाई, संस्थाओं पर हमला! असम में हेमंत सोरेन के बयान से मचा सियासी बवाल

असम में एक छात्र संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन द्वारा चुनाव आयोग, राजभवन और केंद्र सरकार पर की गई टिप्पणियों को विपक्ष ने मर्यादा की सीमा लांघने वाला बताया है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम में दिए गए बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। असम में एक छात्र संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन द्वारा चुनाव आयोग, राजभवन और केंद्र सरकार पर की गई टिप्पणियों को विपक्ष ने मर्यादा की सीमा लांघने वाला बताया है।

झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का आरोप है कि झारखंड के हजारों छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हैं, लेकिन मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं, संवैधानिक संस्थाओं पर सार्वजनिक मंच से आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। बयान में कहा गया है कि जिस संविधान के तहत हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं, उसी संविधान में चुनाव आयोग को SIR जैसी प्रक्रियाओं के अधिकार भी दिए गए हैं।

इतिहास से छेड़छाड़, आदिवासी महापुरुषों का अपमान

राजभवन को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी विपक्ष ने पलटवार किया है। आरोप है कि जमीन घोटाले से जुड़े ईडी नोटिस की अवहेलना खुद मुख्यमंत्री ने की थी। राजभवन ने उन्हें तलब नहीं किया था, बल्कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए आधी रात को स्वयं वहां पहुंचे थे।

इतना ही नहीं, भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हो जैसे आदिवासी नायकों के साथ शिबू सोरेन के नाम को जोड़ने पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है। विपक्ष का कहना है कि यह इतिहास से छेड़छाड़ और आदिवासी महापुरुषों का अपमान है।

भ्रष्टाचार के मामले में घेरा

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री को घेरा गया है। रांची जमीन घोटाले में चार्जशीट, साहिबगंज खनन घोटाले की सीबीआई जांच और ऊर्जा विभाग में करोड़ों के कथित घोटालों का हवाला देते हुए सवाल उठाए गए हैं।

वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि नगर निकाय चुनावों में नए मतदाताओं को बाहर रखकर लोकतंत्र का अपमान खुद राज्य सरकार ने किया है। विपक्ष ने चुनौती दी है कि यदि मुख्यमंत्री को संविधान में आस्था है, तो अद्यतन मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराएं।

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