
हाल के 2-3 दिनों में इंडिगो की करीब 250 से अधिक उड़ानें — विशेष रूप से बड़े हवाई अड्डों जैसे मुंबई एयरपोर्ट, दिल्ली एयरपोर्ट, बेंगलुरु एयरपोर्ट आदि — रद्द हो चुकी हैं।
नवंबर में ही इंडिगो ने लगभग 1,232 उड़ाने रद्द कीं। इसमें से अधिकांश रद्दियों की वजह क्रू / पायलट की कमी बताई गई है।
कई रूट्स पर देरी (delays) भी हुई, जिसके कारण यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ी।

🛫 DGCA के नए नियम — क्या बदला
पायलटों और फ्लाइट-क्रू (केबिन क्रू, फ्लाइट क्रू) की थकान, सुरक्षा और नियमानुसार आराम की अवधि सुनिश्चित करने के लिए DGCA ने नए “ड्यूटी-टाइम / रेस्ट” (FDTL = Flight Duty Time Limitations) नियम लागू किए हैं।
मुख्य बातें:
पायलट और क्रू के लिए अब साप्ताहिक (weekly) आराम अवधि बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई है — पहले 36 घंटे था।
रात (night) में क्रू / पायलट पर विशेष पाबंदियाँ: रात की शिफ्ट (night duty) एवं लैंडिंग्स पर लिमिट — अब रात को सिर्फ 2 लैंडिंग तक, और दो लगातार रातों की ड्यूटी नहीं हो सकती।
फ्लाइट-ड्यूटी टाइम (Flight duty time) और काम के कुल घंटे तय:
एक दिन में अधिकतम उड़ान ड्यूटी 8 घंटे हो सकती है।
एक सप्ताह, एक माह और साल भर में कुल उड़ानों / ड्यूटी घंटों पर भी कैप (limit) लगाई गई है।
इन नियमों का उद्देश्य: पायलट / क्रू की थकावट (fatigue) कम करना और उड़ानों की सुरक्षा बढ़ाना।
इस नए फ्रेमवर्क के कारण — जहां पहले पायलट / क्रू काफी लचीले (flexible) शेड्यूल के साथ उड़ानें भरते थे — अब उन्हें निय़मित आराम देना अनिवार्य हो गया है, और यह एयरलाइनों के लिए ऑपरेशनल शेड्यूलिंग का बड़ा बदलाव है।

📉 इंडिगो पर असर क्यों ज्यादा पड़ा
इंडिगो पर नया नियम खास तौर से इसलिए भारी पड़ा क्योंकि:
इंडिगो भारत की सबसे बड़ी (व्यापक) घरेलू एयरलाइन है — रोजाना हजारों उड़ानों का नेटवर्क है।
रात की उड़ानों (night flights) और लैंडिंग्स पर नई पाबंदियाँ, और साप्ताहिक/मासिक समय-सीमाओं (weekly/monthly duty caps) के कारण, पहले जितने पायलट / क्रू पर काम चलाना संभव नहीं रहा।
इंडिगो ने समय रहते पर्याप्त अतिरिक्त पायलट/क्रू की भर्ती या शिफ्टिंग (roster re-arrangement) नहीं की थी। मतलब बदलावों के लिए तैयारी कम थी।
इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में तकनीकी खामियाँ, सर्दियों में हवाई-अड्डों पर बढ़ी भीड़, एयरपोर्ट जगह और समय- स्लॉट्स की कमी आदि को भी कारण बताया गया है। लेकिन मुख्य रूप से क्रू की कमी और नए नियमों के कारण ही समस्या जवान है।
🚨 नतीजा — यात्रियों और इंडस्ट्री पर असर
यात्रियों को बड़ी असुविधा — फ्लाइट रद्द/देरी, अचानक शेड्यूल बदलना, एयरपोर्ट पर लंबी कतारें — झेलनी पड़ी हैं।
इंडिगो के लिए परिचालन (operations) का संकट — नेटवर्क जितना बड़ा, उतनी दिक्कत; ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) गिरा, भरोसा प्रभावित।
नियामक (DGCA) द्वारा मजबूरी — पायलट/क्रू की थकावट व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियम लागू करना; लेकिन इसका असर एयरलाइनों और यात्रियों दोनों पर पड़ रहा है।

🧑✈️ आगे क्या होगा — क्या उम्मीद की जा रही है
एयरलाइनों को अब अधिक पायलट / क्रू भर्ती करनी होंगी, ताकि नए नियमों के तहत शिफ्ट-रोस्टर बन सके।
शेड्यूलिंग में बदलाव — रात की उड़ानों, लैंडिंग्स का पुनर्गठन, रेस्ट-पीरियड्स को ध्यान में रखकर प्लानिंग।
यदि एयरलाइनों ने समय से तैयारी नहीं की, तो यात्रियों को कुछ हफ्तों तक परेशानी झेलनी पड़ सकती है (रद्द/देरी वाली फ्लाइट्स)।
DGCA व एयरलाइंस के बीच समन्वय व निरीक्षण — यह सुनिश्चित करने के लिए कि नया नियम लागू होने के बाद उड़ान-सुरक्षा बनी रहे लेकिन परिचालन भी सुचारू रहे।
👉🏼 निष्कर्ष
DGCA के नए FDTL नियम — जो क्रू मेंबर्स व पायलट्स की थकावट कम करना और उड़ानों की सुरक्षा बढ़ाना चाहते हैं — का उद्देश्य सही है। लेकिन उसके प्रभाव का दायरा बहुत बड़ा है, खासकर उन एयरलाइनों पर जिनका नेटवर्क विशाल है — और फिलहाल, इंडिगो ने दिखाया कि ऐसा बड़ा बदलाव बिना पर्याप्त तैयारी के लागू करना मुश्किल हो सकता है। यात्रियों को इस transition-phase में असुविधा हो रही है, लेकिन अगर एयरलाइन सही दिशा में कदम उठाती है — यानी पर्याप्त क्रू भर्ती, बेहतर शेड्यूलिंग और संगठनात्मक सुधार — तो भविष्य में यह बदलाव उड़ान सुरक्षा व कर्मचारी भलाई दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।