

पी.वी.आनंदपद्मनाभन
मुंबई,
महाराष्ट्र देश के सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य है और जनहितकारी कानूनों के निर्माण में भी यह राज्य देश में सबसे आगे है, ऐसा गौरवपूर्ण वक्तव्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र द्वारा बनाए गए कई कानूनों को न सिर्फ अन्य राज्य बल्कि कई विदेशी देश भी अपनाते हैं।
विधि व न्याय विभाग के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के हाथों विधि विधान शाखा के प्रतीकचिह्न का अनावरण एवं पाँच पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार, विधि व न्याय विभाग के राज्य मंत्री ॲड. आशीष जयसवाल, मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, प्रधान सचिव सुवर्णा केवले, प्रधान सचिव व विधि सलाहकार श्री शुक्ला, विधि विधान शाखा के सचिव सतीश वाघोले तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की प्रगति में विधि व न्याय विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है। कानून निर्माण की प्रक्रिया में यह विभाग एक प्रमुख भूमिका निभाता है। राज्य के अनेक कानूनों को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया है। विधिमंडल में कानूनों पर तीन-तीन दिन तक चर्चाएं होती हैं और चर्चा के आधार पर ही कानून अस्तित्व में आता है। इस विभाग का यह स्वर्ण जयंती वर्ष है और यह वर्ष विभाग में परिवर्तन की शुरुआत का संकेत होना चाहिए।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जनहितकारी कानूनों का निर्माण आवश्यक है। इस प्रक्रिया में विधेयक का प्रारूपण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कानून आम जनता के हित में कैसे हो, इस दृष्टि से सरकार सदैव प्रयासरत रहती है। विधि व न्याय विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तकें आनेवाली पीढ़ियों के लिए एक धरोहर हैं और यह विधि निर्माण प्रक्रिया में एक संदर्भ सामग्री के रूप में काम आएंगी।
विभाग को सशक्त बनाने के लिए दिए गए प्रस्तावों पर सरकार सकारात्मक है और इस विषय पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण विषय है। विभाग में स्थायी प्रशिक्षण नीति होनी चाहिए और कुछ प्रशिक्षण अनिवार्य किए जाने चाहिए। तकनीक और कार्यपद्धतियों में हो रहे परिवर्तनों के अनुसार प्रशिक्षण भी अद्ययावत होना चाहिए। ग्रामीण भागों के विधि छात्रों की भागीदारी बढ़ाकर इंटर्नशिप कार्यक्रमों की पहुँच व्यापक की जानी चाहिए, ऐसा भी मुख्यमंत्री ने कहा।
सचिव सतीश वाघोले ने कार्यक्रम की प्रस्तावना दी और विभाग की रचना, चुनौतियाँ और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया। आभार प्रदर्शन उपसचिव श्रीमती विनायक कुल्लीवार ने किया। इस कार्यक्रम में विधि व न्याय विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
