Poor AQI: समुद्र तटीय शहर होने के कारण चलने वाली हवाएं साल के ज्यादातर वक्त मुंबई में वायु गुणवत्ता को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखती हैं. लेकिन, साल 2022 से मुंबई की इस स्थिति में बड़ा बदलाव हुआ है और यहां की हवा भी खराब होने लगी है. इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार बढ़ते हुए प्रदूषण को ठहराया जा रहा है. हालांकि, दशहरा के अलगे दिन यानी दिल्ली-एनसीआर के वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई में सुधार दर्ज किया गया है. बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 200 के नीचे पहुंच गया. इससे पहले के चार दिन राजधानी क्षेत्र में एक्यूआई 300 से ऊपर यानी बहुत खराब की श्रेणी में दर्ज किया गया था.
सर्दियों के मौसम में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में हवा की गुणवत्ता में गिरावट चर्चा का विषय बन गई है. तटवर्ती इलाका होने कारण मुंबई को लंबे समय तक वायु प्रदूषण, धुंध और स्मॉग से सुरक्षित माना जाता था. तेज समुद्री हवाएं धूल और दूसरे प्रदूषक कणों को उड़ा देती है. इससे शहर की हवा ज्यादा साफ रहती है. वहीं, पिछले दो साल से मुंबई को अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा मिलना करीब-करीब बंद हो गया है. पिछले साल शहर में खराब वायु गुणवत्ता का सबसे लंबा दौर नवंबर से जनवरी तक चला था. इस दौरान कुछ दिन ऐसे में आए थे, जब मुंबई की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित थी.
मुंबई की हवा के लिए खराब था पिछला हफ्ता
मुंबई के कुछ हिस्सों में पिछले सप्ताह एक्यूआई 300 के पार चला गया था. बता दें कि 200 या इससे ऊपर की एक्यूआई को ‘खराब हवा’ माना जाता है. वहीं, 300 या इससे ऊपर के एक्यूआई को ‘बहुत खराब’ हवा कहा जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना है कि मुंबई की वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट देखी जा रही है. मुंबई की वायु गुणवत्ता तय करने में हवाओं की दिशा और रफ्तार अहम भूमिका निभाती हैं. बता दें कि मुंबई में वाहनों, उद्योगों और दूसरे स्रोतों से कार्बन उत्सर्जन का हाल उतना ही बुरा है, जितना दिल्ली और देश के दूसरे प्रमुख शहरों का है. लेकिन, तटीय शहर होने का मुंबई को विशेष फायदा मिलता रहा है.
कैसे साफ और प्रदूषित होती है मुंबई में हवा
आमतौर पर हवाएं समुद्र से जमीन की ओर चलने और जमीन से समुद्र की ओर चलने के बीच बदलती रहती हैं. यह चक्र साल के इस समय में हर तीन से चार दिन में दोहराया जाता है. जब हवा का रुख जमीन से समुद्र की ओर होता है तो शहर की आवोहवा में घुले धूल कण समंदर की ओर बह जाते हैं. यह प्राकृतिक सफाई तंत्र के तौर पर काम करता है. वहीं, जब कभी किसी कारण से ये चक्र अस्थायी तौर पर बाधित हो जाता है, तो शहर की वायु गुणवत्ता खराब होने लगती है. पिछले साल असामान्य रूप से ये सामान्य चक्र बार-बार और लंबे समय तक बाधित रहा था. इससे शहर की वायु गुणवत्ता खराब की श्रेणी में पहुंच गई. तब हर तीन से चार दिन के बजाय आठ या 10 दिन में हवाओं की दिशा बदल रही थी.