’48 घंटे दे दो, दिखा दूंगा सरकार कैसे चलती है’महाराष्ट्र के लॉ एंड ऑर्डर पर भड़के राज ठाकरे, सीएम शिंदे पर निशाना

मुंबई/नागपुर : महाराष्ट्र के बदलापुर कांड को लेकर नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने एकनाथ शिंदे सरकार को जमकर सुनाई। राज ठाकरे ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि गलती पुलिस की नहीं है। राज ठाकरे ने बदलापुर मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस पर जब दबाव पड़ता है, तब वह कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि उन्हें 48 घंटे दे दिए जाएं तो वह दिखाएंगे कि कानून-व्यवस्था क्या होती है। राज ठाकरे ने राज्य की गिरती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में अपराधियों के बीच कानून का डर नहीं है। इस बात के लिए मैं पुलिस को जिम्मेदार नहीं मानता।’ एमएनएस चीफ का इशारा महाराष्ट्र सरकार की तरफ था।

‘मैं दिखाऊंगा कानून का डर’
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अगर उन्हें 48 घंटा दे दे, तो वह पूरा महाराष्ट्र अपराध‍ियों से मुक्‍त करके दिखा देंगे। वह बोले- ‘एक बार राज ठाकरे के हाथ में सत्ता दो, तो मैं दिखाता हूं सरकार कैसे चलाई जाती है?’ उन्होंने कहा कि कानून का डर क्या होता है मैं दिखाऊंगा। इसके बाद महाराष्ट्र में कोई व्यक्ति किसी महिला की ओर गंदी नजर से देखने की हिम्मत नहीं करेगा।

एमवीए पर निशाना
राज ठाकरे ने कहा कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नेतृत्व वाले दलों को विधानसभा चुनावों में ये सत्ता-विरोधी वोट नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि दलितों और मुसलमानों के एक बड़े हिस्से ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह के खिलाफ ये वोट उद्धव ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस को गए। ये वोट महाविकास आघाडी के नहीं थे। यह लहर अब चली गई है।

शरद पवार पर लगाए आरोप
राज ठाकरे ने कहा कि मनसे आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 225 सीट पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीट हैं। उन्होंने शरद पवार की आलोचना करते हुए दावा किया कि एनसीपी (एसपी) प्रमुख ही राज्य में जाति और दलबदल की राजनीति लेकर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसीपी की स्थापना के बाद संत भी जाति के आधार पर बंट गए।

‘लोगों को काम चाहिए, पैसा नहीं’
राज ठाकरे ने कहा कि यह बात निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती कि ‘लाडकी बहिन योजना’ जैसी योजनाओं के बाद भी लोग सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देंगे। उन्होंने कहा, ‘लोग काम मांग रहे हैं, पैसा नहीं। किसान मुफ्त बिजली नहीं चाहते, वे निर्बाध आपूर्ति चाहते हैं।’ उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या राज्य सरकार के पास इन योजनाओं के लिए पैसा है?

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