
55 मोबाइल फोन जमीन पर पटके गए, स्क्रीन टूटीं और साथ ही अपराध की दुनिया से नाता तोड़ने का ऐलान भी हुआ. हरियाणा के नूंह जिले के सूखपुरी गांव में युवाओं ने चौपाल पर खड़े होकर ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है.
कभी इन्हीं मोबाइल फोन पर कॉल आते थे. कभी इन्हीं स्क्रीन पर नए ‘काम’ की खबर मिलती थी. कभी इन्हीं नंबरों से लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश होती थी. लेकिन इस बार कहानी अलग थी. गांव के चौपाल पर दर्जनों युवक जमा हुए. सामने मोबाइल फोन रखे गए. फिर एक-एक करके 55 मोबाइल जमीन पर पटके गए. स्क्रीन टूटी, कवर बिखरे और शायद उनके साथ अपराध की एक पुरानी जिंदगी भी टूट गई.
हरियाणा के नूंह जिले के एक गांव में यह नजारा सिर्फ मोबाइल तोड़ने का नहीं था, बल्कि नई शुरुआत का ऐलान था. नूंह जिले के नगीना थाना क्षेत्र के सूखपुरी गांव में हाल ही में एक अनोखी पहल देखने को मिली. गांव के कुछ युवकों ने सार्वजनिक रूप से 55 मोबाइल फोन तोड़ दिए और ऐलान किया कि अब वे अपराध की दुनिया से कोई रिश्ता नहीं रखेंगे. यह फैसला अचानक नहीं आया था. इसके पीछे पुलिस और ग्रामीणों की लंबे समय से चल रही कोशिशें थीं.
दरअसल, नूंह पुलिस अपराध छोड़ने और कानून का पालन करने को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चला रही है. पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान का असर सूखपुरी गांव में दिखाई दिया.
गांव के बुजुर्ग, पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और युवा एक जगह इकट्ठा हुए. बातचीत हुई. भविष्य की चर्चा हुई. इसके बाद युवाओं ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे अब अपराध से जुड़े किसी भी काम का हिस्सा नहीं बनेंगे. इसी दौरान उन्होंने अपने पास मौजूद 55 मोबाइल फोन तोड़ दिए.
ग्रामीणों का कहना है कि ये मोबाइल उनके पुराने नेटवर्क और गलत गतिविधियों से जुड़े संपर्कों का माध्यम थे. युवाओं का मानना था कि अगर नई जिंदगी शुरू करनी है तो सबसे पहले पुराने रास्तों से नाता तोड़ना होगा.
कार्यक्रम में मौजूद डीएसपी अभिषेक खटकड़ और नगीना थाना प्रभारी सचिन कुमार ने युवाओं के इस कदम की सराहना की. अधिकारियों ने कहा कि पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं है. अगर कोई व्यक्ति अपनी गलती सुधारना चाहता है और मुख्यधारा में लौटना चाहता है, तो उसे अवसर मिलना चाहिए. पुलिस का कहना है कि जो लोग ईमानदारी से जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा.

