
ईरान दशों में अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और इजरायल ने भीषण हमला बोल रखा है, जिससे वह अकेले निपट रहा है। खास बात है कि रूस और चीन जैसे दोस्त दूर से सब देख रहे हैं।
अमेरिका-इस्राइल के साथ जारी जंग में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान के बड़े सहयोगी रूस और चीन खुलकर उसके साथ क्यों नहीं खड़े हो रहे है। रूस और चीन ने ईरान पर हमलों की आलोचना तो की है और सुरक्षा परिषद की तुरंत बैठक बुलाने की मांग की है, लेकिन अभी तक ईरान को सैन्य मदद देने से दूरी बनाए रखी है। अरब न्यूज वेबसाइट aljazeera.com के मुताबिक, इसके पीछे कई वजहें हैं।
सीधे जंग में नहीं कूदना चाहता रूस
रूस और ईरान के बीच करीबी संबंध है और दोनों ने 2025 में रणनीतिक साझेदारी का समझौता भी किया था। चूकि यह सैन्य गठजोड़ नहीं है, इसलिए रूस पर ईरान की रक्षा करने की कानूनी बाध्यता नही है। रूस फिलहाल सीधे टकराव से बचना चाहता है और खुद को मध्यस्थ की भूमिका में दिखाने की कोशिश कर रहा है।
हितों पर जोखिम नहीं चाहता चीन
चीन ईरान का बड़ा तेल खरीदार है, लेकिन उसके सऊदी और UAE जैसे अन्य खाड़ी देशो से भी आर्थिक रिश्ते है। इसलिए चीन किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़ा होने से बच रहा है।
पश्चिम एशिया में संतुलन की कोशिश
चीन और रूस दोनों की कोशिश है कि वे ईरान और उसके विरोधी देशो के साथ सतुलन बनाए रखे। अगर ईरान का खुला समर्थन करते है, तो अन्य साझेदार नाराज हो सकते है।
अमेरिका से सीधे टकराव का खतरा
अगर रूस या चीन सीधे सैन्य मदद देते है तो इससे अमेरिका के साथ बड़ा वैश्विक टकराव हो सकता है, इसलिए दोनों देश फिलहाल कूटनीतिक बयान तक ही सीमित है।
ईरान ने हथियार नहीं मांगे: रूस
रूस ने गुरुवार को कहा कि ईरान ने जंग में हमसे हथियार भेजने का कोई अनुरोध नही किया है। रूसी राष्ट्रपति के दफ्तर क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में ईरान से कोई मांग नहीं आई है। रूस का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल अपने हमलों के जरिए अरब देशों को युद्ध में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के विदेश मत्रालय ने कहा कि ईरान पर हमलों के बाद भी तनाव कम होने के कोई सकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका और इजरायल ने जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा की है।
ड्रोन पर जेलेंस्की की पेशकश
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेस्की ने कहा कि अमेरिका और पश्चिम एशिया में सहयोगी देश ईरान के ड्रोन का मुकाबला करने में यूक्रेन की मदद चाहते हैं। उन्होंने कई देशों से इस संभावित सहयोग के बारे में बात की है। जेलेंस्की ने कहा कि ईरान के ड्रोन हमलों का मुकाबला करने में यूक्रेन की मदद तभी मिलेगी, जब यूक्रेन की अपनी सुरक्षा कमजोर न हो।
चीनी एक्सपर्ट ने ईरान पर क्या कहा?
चीन के विदेश मामलों की जानकारी युन सुन ने कहा कि हमले के बाद (ईरान में) जो भी लीडरशिप सामने आएगी, चीन उसके साथ काम करने को तैयार है। बशर्ते वह तेल के फ्लो को बचाए और साझा आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे। अगर इन हितों को खतरा होता है, या लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई से होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट रुकावट आती है, तभी बीजिंग को किनारे रहने की अपनी जगह पर फिर से सोचना होगा और ज्यादा जोरदार जवाब देना होगा

