
अचला सचदेव ने लगभग 50 साल तक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया, वह मां, दादी के किरदारों में अधिक नजर आईं। आज अचला सचदेव की जयंती (3 मई 1920) है। इस मौके पर जानिए, अचला सचदेव के फिल्मी करियर और निजी जीवन से जुड़ी खास बातें।
फिल्म ‘वक्त(1965)’ में अभिनेता बलराज साहनी का किरदार अपनी पत्नी के लिए एक गाना गाते हुए नजर आता है, ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं…’। यह गाना आज भी सदाबहार है, मशहूर है। इस गाने में बलराज साहनी की पत्नी के रोल में अचला सचदेव ही थीं। इसी तरह फिल्म ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे(1995)’ में अचला, सिमरन (काजाेल) की दादी के रोल में दिखीं। मां से लेकर दादी तक के किरदार अचला सचदेव ने कई फिल्मों में निभाए हैं। इस वजह से उन्हें मदर ऑफ बॉलीवुड भी कहा जाता था। जानिए, अचला सचदेव के करियर, पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातों के बारे में।
लगभग 130 फिल्मों में किया अभिनय
आजादी से पहले पेशावर (मौजूदा पाकिस्तानी में) में अचला सचदेव का जन्म हुआ। बड़ी हुईं तो ऑल इंडिया रेडियो, लाहौर में काम करने लगीं। आजादी के बाद भारत आ गईं तो दिल्ली के ऑल इंडिया रेडियो को ज्वाइन कर लिया। रेडियो के बाद अचला ने फिल्मों की तरफ कदम बढ़ा दिए। अपने करियर में लगभग 130 से अधिक फिल्में अचला ने की थीं। उन्होंने फिल्म ‘दिलरूबा(1950)’ से करियर शुरू करते हुए ‘कभी खुशी कभी गम(2001)’ तक सफर तय किया। साल 2001 के बाद वह बड़े पर्दे से दूर हो गईं।
इन चर्चित फिल्मों का बनीं हिस्सा
अचला सचदेव ने अपने करियर में कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया। वह यश चोपड़ा की पहली प्रोडक्शन फिल्म ‘दाग: ए पोएम ऑफ लव (1973)’ और ‘चांदनी (1989)’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995)’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बनीं। इनके अलावा अचला ‘प्रेम पुजारी’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जैसी फिल्मी भी कीं। अचला सचदेव कुछ इंग्लिश फिल्मों में भी दिखीं, जिनमें ‘नाइन ऑवर्स टू रामा (1963)’ और ‘द हाउसहोल्डर (1963)’ शामिल रहीं। फिल्म ‘वक्त(1965)’ के लिए तो अचला को हमेशा याद किया जाता है, इसमें उनकी जोड़ी बलराज साहनी के साथ खूब जमीं।
यश चोपड़ा ने सच्चे प्यार से मिलवाया
अचला सचदेव जब फिल्मों में अभिनय कर रही थीं तो उनका तलाक हो चुका था। यश चोपड़ा अभिनेत्री को काफी मानते थे। एक बार यश चोपड़ा ने अचला सचदेव की मुलाकात पीटर नाम के शख्स से करवाई, वह पुणे के एक बिजनेसमैन थे। अचला और पीटर की नजदीकियां बढ़ीं, जो प्यार में बदल गईं। बाद में दोनों ने शादी कर ली, अचला भी पुणे में जाकर रहने लगीं। जब पति पीटर का निधन हुआ तो अचला ने अपनी संपत्ति एक चैरिटेबल ट्रस्ट को दे दी। इस संस्था ने आखिर तक अचला का ख्याल भी रखा। साल 2011 में अचानक अचला फिसल गईं तो उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया, इसके बाद भी उन्हें कुछ और सेहत से जुड़ी दिक्कत हुईं। साल 2012 में 91 साल की उम्र में अचला सचदेव का निधन हो गया।



