


प्रेस फोटोग्राफर : भास्कर.एस.महाले
महाराष्ट्र। नाशिक जिले में आदिवासी अनुसूचित क्षेत्र) समुदाय के लोग भारी बरसात के दिनों में अपने हक्क एवं चेसा अधिनियम क़ानून के अधिकारों द्वारा 9? तरह कि नौकरिया कि नई पद नियुक्ति के मुद्दों और वन अधिकारों के अन्य मांग क़ो लेकर आज चार दिनों से सड़कों पर अड़े बैठे हैं।सुरगाना तालुका कि सभी स्कूल कि शिक्षा व्यवस्था तहसील कि मार्केट एवं सब्जी मंडी मार्केट भी चार दिनों से बंद रही हैं।गुजरात के सूरत,सापूतारा और महाराष्ट्र के नाशिक ट्रांसपोर्ट कि अन्य मार्गों पर चकका जाम आंदोलन लगने कि वज़ह से भारी वाहनों का एवं अन्य वाहनों का आना-जाना बंद हों चूका हैं।लगातार चल रहें चक्का जाम आंदोलन के कारण भारी वाहनों मे मार्केट कि भरे सब्जियाँ जैसे कई चीजों का बड़ी मातर मे जुकसान होकर ट्रांसपोर्ट मं भी दिक्कते आ रहीं हैं।
आदिवासी विकास भवन कार्यालय, नाशिक में अमरन ‘उपोषण में बैठे आदिवासी नेताओं और चक्का जाम आंदोलनकरियो के लोगों का कहना हैं,कि जब तक सरकार हमारी मांगे पूरी नही करता हैं,तब तक ये बे-मुदत अमरण उपोषण द्वारा चक््का जाम आंदोलन जारी रहेगा। “एक हीं नारा अभी नहीं तो कभी वहीं * यह चक्का जाम आंदोलन में स्कूल,कॉलेज के छात्र एवं उच्च शिक्षित बे-रोजगार युवक युवतियाँ बड़ी मात्र में शामिल हुईं देखने क़ो मिल रहीं हैं।शामिल हुए छात्रों का ‘कहना हैं कि आज हम पढ़ लिखकर बेरोजगार होकर घर बैठे हैं।और सरकार एक तरफ रोजगार देने कि बात कह रहा हैं। फ़िर आदिवासीयों के पेसा क्षेत्रों में नौकरीयों कि नियुक्तियां क्यू नहीं हों रहीं।महाराष्ट्र सरकार से पूछ रहें हैं. जलोग,पेसा के तहत पद नियुक्तियां होगी या नहीं होगी. आंदोलन में गूँज रहा एक हीं नारा अभी नहीं तों कभी नहीं।इस नारे के उपर सरकार का जवाब नहीं।बे- मुदत अमरण उपोषण द्वारा लगातार चार दिन-रात चल रहें चक्का जाम आंदोलन के ऊपर अभी तक सरकारनें इसके ऊपर किसी भी तरह का सड़कों पर लगे चक्का जाम खोलने का फैसला नहीं दिया हैं।पुजरात सापूतारा ‘हिलस्टेशन के कई यात्रियों के परिवार महाराष्ट्र के लगे चक्का जाम आंदोलन में फसे हुए हैं। आज चार दिनों से उनको सड़कों पर खड़ी गाड़ियों में रहेना पड रहा हैं। चाँचवा दिन आंदोलन का लग चूका हैं। अभी तक चक्का जाम आंदोलन वाफ़ससी का निर्णय पर महाराष्ट्र सरकारणे कोई फैसला नहीं दिया हैं।। आने वाले दिनों में इस तरह का बे-मुदत उपोषण का चक््का जाम आंदोलन बढ़ते जाने से जिले के सभी क्षेत्रों के स्कूल, कॉलेज के छात्राओं के शिक्षा व्यवस्था नुकसान हों सकता हैं।उसके बावजूद अभी तक महाराष्ट्र सरकार कुम्भकरण कि गहरी नींद में सो रहीं हैं।जनकल्थाण टाईम न्यूज़ कि ग्राउंड रिपोर्ट मे नाशिक जिले के सुरगाना, पेठ, कब्ववन क्षेत्र के सभी ग्रामीण इलाकों से लेकर मेन ट्रांसपोर्ट महामार्ग नाशिक,डिंडोरी,वणी,बोरगांव,लाड़गाव,उम्बरठान,हतगड़ चौराहे से लेकर गुजरात सापूतारा सड़कों पर पुरे चार दिनों से चक्का जाम आंदोलन लगा चूका हैं।क़्या अभी भी महाराष्ट्र सरकार नाशिक जिले के आदिवासी विकास भवन कार्यालय पर चल रहें बे-मुदत अमरण उपोषण द्वारा चचका जाम आंदोलन में बैठे आम लोगों कि समस्थाए का हल नहीं निकाल सका?