नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में लैब और इमेजिंग सेंटर अपनी मनमर्जी से चल रहे हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए कोई नियम या कानून नहीं है। ये सेंटर दिल्ली नर्सिंग होम एक्ट के दायरे में भी नहीं आते हैं। जांच का तरीका क्या होगा, पैथोलॉजिस्ट हैं या नहीं, टेक्नीशियन सक्षम हैं या नहीं, हर सवाल से बाहर हैं लैब और इमेजिंग सेंटर। ऐसे में इनकी रिपोर्ट पर सवाल उठाने पर भी आपको न्याय मिलने की उम्मीद कम है। एक्सपर्ट भी मानते हैं कि दिल्ली में लैब व इमेजिंग सेंटर के लिए कानून होना चाहिए।
दरअसल, बेबी केयर न्यू बॉर्न सेंटर में आग लगने की घटना के बाद इस बात पर चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि अगर सेंटर का रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल नहीं था तो फिर यह सेंटर कैसे चल रहा था। इस पर सरकार की तरफ से भी पक्ष रखा जा चुका है और एक्सपर्ट भी बात रख चुके हैं। नर्सिंग होम के साथ अगर लैब और इमेजिंग सेंटर की जांच, जांच के तरीके आदि पर चर्चा करें तो चौंकाने वाले तथ्य यह है कि दिल्ली में लैब व इमेजिंग सेंटर को कंट्रोल करने के लिए कोई एक्ट नहीं है। सभी अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं।
बिना टेस्ट किए देते हैं सैंपल की रिपोर्ट
एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली ही नहीं पूरे देश में सिंक टेस्ट का प्रचलन है। इसमें लैब वाले सैंपल सिंक में फेक देते हैं और अपनी मर्जी से रिपोर्ट तैयार कर देते हैं। यह तरीका अक्सर मिलीभगत से चलता है। खासकर ऐसी जगहों में जहां पर डॉक्टर और लैब मालिक मिलकर मरीज को धोखा देते हैं। डॉक्टर मरीज को बिना वजह ढेर सारे टेस्ट लिख देते हैं। लैब वाले मरीज से इन जांचों के काफी पैसा लेते हैं और लैब वाले अपने मन से रिपोर्ट बनाकर दे देते हैं, जिसमें सभी जांच सही बता दी जाती है। मरीज के पास इसका कोई सॉल्यूशन नहीं है, उन्हें पता तक नहीं होता है।
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