मुंबई: मालेगांव में 2008 में हुए विस्फोट मामले (Malegaon Blast Case) के एक आरोपी रमेश उपाध्याय (Ramesh Upadhyay) ने मंगलवार को दावा किया कि “हिंदू आतंकवाद” को साबित करने के लिए तत्कालीन संप्रग सरकार द्वारा दबाव बनाये जाने के चलते महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ता (ATS) ने उन्हें फंसाया था। विशेष एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) को सौंपे अपने बयान में उपाध्याय ने दावा किया कि वह बेकसूर हैं और विस्फोट से उनका कोई लेना-देना नहीं है। बयान में कहा गया है, “मैं एक निर्दोष आरोपी हूं, जिसे केंद्र और राज्य की संप्रग सरकारों द्वारा हिंदू आतंकवाद सिद्धांत को सही ठहराने के लिए डाले गए राजनीतिक दबाव के कारण मुंबई के आतंकवाद रोधी दस्ते ने इस मामले में फंसाया गया था।”
बयान में कहा गया है कि एटीएस ने “अवैध हिरासत” में न केवल उन्हें प्रताड़ित किया बल्कि मानसिक यातना भी दी। मुंबई से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मालेगांव में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल से बांध कर रखे बम में हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।
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