नई दिल्ली। देश के आम चुनाव कांग्रेस के लिए खासे अहम है। पार्टी आलाकमान इस चुनाव को आर-पार का मानकर चल रहा है। यही वजह है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में उतारने पर विचार चल रहा है। कांग्रेस की केन्द्रीय चुनाव कमेटी (सीईसी) की 7 मार्च को होने वाली बैठक में इस पर निर्णय हो सकता है।
दरअसल, 10 सालों से केन्द्र की सत्ता से बाहर कांग्रेस के लिए अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है। ऐसे में हिंदी पट्टी के उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली समेत कुछ अन्य राज्यों में पार्टी के दिग्गज नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अलग-अलग प्रदेश इकाइयों की बैठक में इसके संकेत भी दिए थे। दोनों नेताओं ने सभी वरिष्ठ नेताओं को चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया था। अब बताया जा रहा है कि कुछ राष्ट्रीय महासचिव, सीडब्ल्यूसी सदस्य, प्रदेश अध्यक्षों के अलावा कुछ राज्यसभा सांसदों, विधायकों को चुनाव लडऩे के लिए कहा जा सकता है।
दिग्गजों के लडऩे का होगा असर
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अधिकांश राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर है। यदि दिग्गज नेताओं को चुनाव में उतारा जाता है तो उसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर दिखेगा। वहीं आसपास की सीटों के समीकरण भी बदल जाते हैं। हालांकि अधिकांश बड़े नेताओं के चुनाव में उतारने से प्रचार अभियान पर असर पड़ सकता है। इसमें संतुलन बिठाने को लेकर पार्टी में चर्चा चल रही है।
हार गए तो…
2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा फर्क है। 2019 के दौरान कांग्रेस की राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में सरकार थी। इनमें राजस्थान और मध्यप्रदेश में कांग्रेस का बहुमत मार्जिन पर था। वहीं दिग्गज नेताओं ने हार के बाद मंत्री पद जाने के चलते लोकसभा चुनाव लडऩे से मना कर दिया था। इस बार के हालात अलग है, कांग्रेस विपक्ष में है। यदि कोई दिग्गज नेता चुनाव हार भी जाता है तो उसकी स्थिति पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
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