हम जहां प्रार्थना करते है, केवल वहीं ईश्वर नही होता। ईश्वर वहां भी होता है जहां हम गुनाह करते है।। मंदिर में ईश्वर के सामने जाते है। तो अपने आपको साफ सुथरा बना कर जाते है।। क्योंकि हम ये सोचते है कि ईश्वर सिर्फ यहीं है। जब हम किसी के साथ दुर्व्यवहार करते है।। अपशब्द बोलते है तब ये भूल जाते है। कि ईश्वर यहां भी है।। मतलब हम सिर्फ अपनी सुविधा के तरीके से ये मानते है। कि यहां ईश्वर है,औऱ यहां नही है, असल में तो ईश्वर ना यहां है।। ना वहां है ईश्वर आपके ह्रदय में है। आपकी वाणी में है, ईश्वर कहा तक जा सकता है।। कहा हो सकता है। जहां तक आपके विचार जाते है।। वहां तक ईश्वर है। आज से जब भी आप के मन मे कोई दुर्भावना, क्रोध उत्पन्न हो तो ये जरूर याद कर लेना की ईश्वर यहां भी है।।*
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