गुनाह सबसे होता है, कोई भी बेगुनाह नहीं होता। मनुष्य चूंकि संवेदनशील और चेतनाशील होता है इसलिए वह सही-गलत करता है और उसकी पहचान कर पाता है। इन्हीं अनुभूतियों को शायर अपने लफ़्जों में ढालता है। तो पेश है गुनाह पर स्टैंड अप कॉमेडियन बी आशीष के बी आशीष जिसमें वो कहतें हैं ‘कसूर तो बहुत किये थे ज़िन्दगी में, पर सज़ा वहाँ मिली जहाँ बेकुसूर थे हम’
