जिंदगी को बिंदास होकर जीना चाहिए। आप जिंदगी को जितना गंभीरता से लोगे, यह उतनी ही पेचिदा और जटिल लगेगी। बोझ लगेगी, नीरस हो जाएगी। आप पर हावी हो जाएगी। आप थकान महसूस करने लगेंगे। आप जिंदगी से जंग करेंगे तो यह आपको कमजोर कर देगी। जिंदगी को जीना है तो इसे खेल की तरह लो, जिसमें प्रतिस्पर्धा तो है, जीतने का लक्ष्य भी और मकसद भी है, लेकिन हार भी गए तो क्या हुआ दूसरी पारी खेलो और तब तक खेलो जब तक जीत या मकसद हासिल न हो जाए। क्या कोई जुझारू खिलाड़ी हार जाने पर खेलना छोड़ देता है ? बिल्कुल नहीं वो सिर्फ पारी या प्रतियोगिता हारता है, खेल नहीं। जिंदगी को खुशी से जीने वाले किसी शख्स से कभी पूछना कि उसकी खुशनुमा जिंदगी का राज़ क्या है तो वो आपको बताएगा। जिंदगी जिंदादिली का ही नाम है। इसीलिए RLG प्रोडक्शन के इस प्रेरक वीडियो में मशहूर कॉमेडियन और मोटिवेशनल गुरु बी आशीष कहते हैं, जिंदगी अपने हिसाब से ही जीनी चाहिए। लोगों को खुश रखने के चक्कर में तो “शेर” को भी सर्कस में नाचना पड़ता है….
