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वकील, सांसद और फायर फाइटर भी… कौन हैं अमेर‍िकी पॉल‍िट‍िक्स में छाए सुहास सुब्रह्मण्यम?

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में वर्जीनिया के 10वें कोंग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज करने वाले सुहास सुब्रह्मण्यम सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं. पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के सलाहकार रह चुके सुहास एक वकील, तकनीकी उद्यमी और वॉलंटियर फायर फाइटर भी हैं. जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाले तथ्य.

अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के कई चेहरे अपनी चमक बिखेर रहे हैं, लेकिन अगर बात एक ऐसे राजनेता की करें जिसकी लाइफस्टाइल और काम करने का तरीका सबसे अलग और बहुमुखी है, तो सुहास सुब्रह्मण्यम का नाम सबसे आगे आता है.

ओबामा प्रशासन में नीति निर्माता से लेकर वर्जीनिया के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने वाले सुहास की जिंदगी में कई ऐसे पहलू हैं जो आमतौर पर किसी राजनेता में एक साथ देखने को नहीं मिलते. आइए जानते हैं सुहास सुब्रह्मण्यम के बारे में कुछ बेहद दिलचस्प और अनोखे तथ्य… 

रात में राजनीति, इमरजेंसी में ‘फायर फाइटर’ और EMT

सुहास सुब्रह्मण्यम की सबसे अनूठी बात यह है कि वे सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सीमित नहीं रहते. वर्जीनिया में वे लाउडौन मेडिकल रिजर्व कॉर्प के तहत एक सक्रिय वॉलंटियर इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और फायर फाइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. यानी जरूरत पड़ने पर वे तुरंत दमकल की वर्दी पहनकर आग बुझाने और आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए मैदान में उतर जाते हैं.

कानून के छात्र रहते हुए बेगुनाह को जेल से कराया बरी

जब सुहास प्रतिष्ठित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से कानून (Law) की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने ‘सेंटर ऑन रॉन्गफुल कन्विकशंस’ के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के केस पर रात-दिन मेहनत की जिसे गलत तरीके से उम्रकैद की सजा सुना दी गई थी. सुहास की कानूनी दलीलों और सबूतों के दम पर उस निर्दोष व्यक्ति को जेल से रिहा कराया जा सका.

ओबामा के ‘टेक-मास्टर’

व्हाइट हाउस में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष सलाहकार के रूप में काम करते हुए सुहास ने अमेरिका की राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी नीतियों को आकार दिया. उन्होंने AI, साइबर सुरक्षा और आईटी क्षेत्र में रोजगार सृजन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण टास्क फोर्स का नेतृत्व किया. ओबामा प्रशासन के बाद उन्होंने खुद की एक आईटी और कंसल्टिंग फर्म भी स्थापित की.

वर्जीनिया के इतिहास में दर्ज कराया पहला नाम

राजनीति में आने के बाद सुहास ने साल 2019 में वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलिगेट्स का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसी के साथ वे वर्जीनिया जनरल असेंबली के इतिहास में चुने जाने वाले पहले दक्षिण एशियाई और पहले हिंदू/भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधि बने. इसके बाद वे वर्जीनिया स्टेट सीनेट पहुंचे और अब अमेरिकी संसद के सदस्य हैं.

इंड‍िया से क्या है कनेक्शन

सुहास के माता-पिता 1970 के दशक में भारत (चेन्नई/दक्षिण भारत) से अमेरिका जाकर बस गए थे. सुहास का जन्म ह्यूस्टन, टेक्सास में हुआ. उनकी पत्नी मिरांडा सुब्रह्मण्यम एक कम्युनिटी वॉलंटियर हैं और उनकी दो छोटी बेटियां हैं. सुहास अक्सर अपनी भारतीय-अमेरिकी विरासत और संस्कृति को अपनी सफलता का मुख्य आधार बताते हैं.