Ajit Pawar Corruption Case: महाराष्ट्र के बहुचर्चित शिखर बैंक घोटाला मामले में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मुश्किलें जारी है। हाल ही में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। खबर है कि इस क्लोजर रिपोर्ट का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) विरोध कर रही है।
मुंबई पुलिस का कहना है कि एनसीपी प्रमुख अजित दादा के खिलाफ मामले में कोई सबूत नहीं मिला है। लेकिन इस मामले में ईडी ने हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अनुरोध किया गया है। इसलिए बीजेपी के साथ गए अजित पवार की मुश्किलें अभी भी बरकरार हैं।
शिखर बैंक घोटाला मामले में आर्थिक अपराध शाखा की क्लोजर रिपोर्ट का ईडी की ओर से विरोध किया जा रहा है। ईडी ने कोर्ट से हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने की इजाजत मांगी है। इस पर सुनवाई 15 मार्च को होगी।
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने अजिक पवार और अन्य नेताओं से जुड़े शिखर बैंक घोटाले में पिछले महीने दूसरी बार क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। हालांकि, ईडी ने इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। ईडी को अभी तक कोर्ट से इजाजत नहीं मिली है। लेकिन अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।
मुंबई पुलिस की मूल एफआईआर में अजित दादा और अन्य नेताओं को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है।
मालूम हो कि अक्टूबर 2020 में जांच एजेंसी ने एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, तब राज्य में महाविकास अघाडी सत्ता में थी। लेकिन दो साल बाद उद्धव ठाकरे की सरकार गिरने के बाद अक्टूबर 2022 में ईओडब्ल्यू ने कहा कि वह अपनी जांच जारी रखना चाहती है।
लेकिन 20 जनवरी को ईओडब्ल्यू की ओर से अदालत को बताया गया कि सारे सबूतों और पहलुओं की जांच में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं मिला है और इसलिए एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई।
अजित पवार का नाम सिंचाई और शिखर बैंक घोटाले में शामिल है। अजित पवार जब विपक्ष में थे तो बीजेपी इसे लेकर उन पर जोरदार हमला बोलती थी। पिछले साल अजित पवार के साथ एनसीपी के 40 विधायक शिवसेना-बीजेपी की सरकार में शामिल हो गए। लेकिन सत्ता में आए अजित पवार की मुश्किलें अभी भी बरकरार हैं। शिखर बैंक घोटाले में ईडी की भूमिका ने अजित पवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
शिखर बैंक घोटाला क्या है?
इस कथित घोटाले से बैंक को कुल 2 हजार 61 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आरोप है कि शिखर बैंक ने 15 साल पहले राज्य की 23 सहकारी चीनी मिलों को लोन दिया था। हालाँकि, ये फैक्ट्रियाँ घाटे के कारण डूब गईं। इसी बीच इन फैक्ट्रियों को कुछ नेताओं ने खरीद लिया। इसके बाद फिर शिखर बैंक की ओर से इन फैक्ट्रियों को लोन दिया गया। तब अजित पवार इस बैंक के निदेशक बोर्ड में थे। इस मामले में अजित दादा के साथ-साथ अमर सिंह पंडित, माणिकराव कोकाटे, शेखर निकम जैसे नेता भी आरोपी है। ईडी ने इस मामले में अजित पवार को समन भेजा था।
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