देश के 1083 स्टेशनों पर धूम मचा रही है PM Modi की OSOP स्कीम, एम.एल परमार से जानिए लोकल कारीगरों को कैसे पहुंचा रही है फायदा

नवसारी। रेल मंत्रालय ने भारत सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) विजन को बढ़ावा देने, स्थानीय/स्वदेशी प्रोडक्ट के लिए एक मार्केट प्रदान करने और समाज के वंचितों वर्गो के लिए अतिरिक्त आय के अवसर जुटाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) स्कीम शुरू की है. इस योजना के तहत, रेलवे स्टेशनों पर OSOP केन्द्रों को स्वदेशी/स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने, बेचने और उच्च दृश्यता प्रदान करने के लिए आवंटित किया जाता है. देश के 21 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 1189 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर इसके आउटलेट खोले गए हैं. नवसारी रेल्वे स्टेशन के. एम एल परमार ने जन कल्याण टाइम न्यूज के एडिटर इन चीफ राजेशभाई गावड़े और मशहूर कॉमेडियन बी आशीष को वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के बारे में जानकरी दी। वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे एम एल परमार जी प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता और स्टैंड अप कॉमेडियन बी आशीष से बातचीत के दरमियान जानकारी देते हुए नजर आ रहे हैं। वो बताते हैं कि वन स्टेशन वन प्रोडक्ट को लेने का मकसद ये है कि देश की गरीब जनता जो गरीबी रेखा से नीचे है उनको साथ मिले, कोई बेरोजगारी से देश में कोई भूखा ना रहे, ये एक छोटा सा प्रयास है सरकार का। आम जनता से जन कल्याण टाइम न्यूज के माध्यम से जन-जन तक ये संदेश को पहुंचाया जा रहा है। नवसारी शहर ही नहीं बल्की जहां जहां ये योजना लागू है, एम.एल परमार जन कल्याण टाइम न्यूज के माध्यम से लोगों को अपील करते हैं कि इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा लोग ले सके। आपको इस संबंध में कोई भी जानकारी चाहिए तो 8000298989 पर एम.एल परमार से संपर्क कर और ज्यादा जानकारी प्राप्त की जा सकती है। परमार साहेब से जानकारी लेकर हमने निम्नलिखित खबर बनाई है। पढ़ें और शेयर करें।

क्या है वन स्टेशन वन प्रोडक्ट
‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ स्थान विशेष के लिए विशिष्ट हैं और इसमें स्वदेशी जनजातियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां, स्थानीय बुनकरों द्वारा हथकरघा, विश्व प्रसिद्ध लकड़ी की नक्काशी जैसे हस्तशिल्प, कपड़े पर चिकनकारी और जरी-जरदोजी का काम या मसाले चाय, कॉफी और अन्य संसाधित/अर्द्ध संसाधित खाद्य पदार्थ/उत्पाद जिनका देश में उत्पादन हुआ है, शामिल हैं.

उदाहरण के लिए, पूर्वोत्तर भारत में असमिया पीठा, पारंपरिक राजबंशी पोशाक, झापी, स्थानीय कपड़ा, जूट उत्पाद (टोपी, गमछा, गुड़िया) ओएसओपी स्टालों पर उपलब्ध हैं और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र, कश्मीरी गिरदा, कश्मीरी कहवा और सूखे मेवे प्रसिद्ध हैं, दक्षिण भारत में काजू उत्पाद, मसाले, चिन्नालापट्टी हथकरघा साड़ियाँ यात्रियों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं, देश के पश्चिमी भाग में कढ़ाई और ज़री ज़रदोज़ी, नारियल हलवा, स्थानीय रूप से उगाए गए फल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, बंधनी प्रसिद्ध हैं.

देश में 1083 से अधिक स्टेशनों पर है मौजूद OSOP
रेल मंत्रालय ने बताया कि ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत, रेलवे स्टेशनों पर ओएसओपी केन्द्रों को स्वदेशी/स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने, बेचने और उच्च दृश्यता प्रदान करने के लिए आवंटित किया जाता है. इसकी पायलट योजना 25.03.2022 को शुरू की गई थी और 01.05.2023 के अनुसार पूरे देश के 21 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 1189 ओएसओपी केन्द्रों के साथ 728 स्टेशनों को शामिल किया गया है. इन ओएसओपी स्टालों को एकरूपता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के माध्यम से डिजाइन किया गया है. मार्च 2022 से 01.05.2023 तक संचयी प्रत्यक्ष लाभार्थियों की संख्या 25,109 हो गई है.

इन कलाओं को मिला बढ़ावा
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने दावा किया कि ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ योजना स्थानीय कारीगरों, कुम्हारों, बुनकरों, जन-जातियों के बेहतर जीविकोपार्जन एवं कल्याण सहित आजीविका और कौशल विकास के अवसर प्रदान करने तथा स्थानीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में मदद करने में सफल रही है. इससे स्थानीय हस्तशिल्प व छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिला है.

वन स्टेशन वन प्रोडक्ट में मिलते हैं ये प्रोडक्ट
बिहार के ओएसओपी केंद्रों पर स्थानीय कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित भगवान बुद्ध की मूर्तियां और अन्य काष्ठ कलाकृतियां, जरी जरदोजी के परिधान व अन्य वस्तुएं, मधुबनी पेंटिंग, हस्तनिर्मित सजावटी सामान, हथकरघा उत्पाद, काला चावल जैसे स्थानीय कृषि उत्पाद, मिठाइयों, अचार जैसे स्थानीय खाद्य उत्पादों का प्रदर्शन व बिक्री की जाती है.

कारीगरों को मिला बाजार
रेलवे स्टेशनों पर ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ केंद्रों के होने से स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को एक बड़ा बाजार मिल रहा है और उनसे जुड़े स्थानीय कारीगर व अन्य लोग इस अतिरिक्त आय स्रोत से लाभान्वित हो रहे हैं. इससे स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार का एक नया अवसर पैदा हुआ और वे आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं. गया निवासी एक स्टॉल संचालक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्वरोजगार से जुड़े छोटे कामगारों को अपने पैर पर खड़ा होने के लिए गया जैसे अति व्यस्ततम रेलवे स्टेशन पर अपने लोकल उत्पाद को बेचने एवं प्रचार-प्रसार का बड़ा अवसर मिला.

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