सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आसाराम की गुजरात रेप केस में अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। आसाराम ने बीमार पत्नी से मिलने के लिए राहत मांगी थी। उनकी सजा के खिलाफ अपील पर 17 नवंबर को सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खुद को भगवान बताने वाले आसाराम की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में 2013 के गांधीनगर शोषण केस में अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए जमानत न देने के गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने 85 साल के आसाराम के वकील को जमानत याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। बेंच ने यह देखा कि जोधपुर में नाबालिग के साथ यौन शोषण के मामले में उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट से पहले ही 26 अक्तूबर तक पैरोल मिल चुकी है

सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं पर कर रहा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट आसाराम की दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। एक गुजरात मामले में अंतरिम जमानत के लिए और दूसरी राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील, जिसमें जोधपुर में दर्ज मामले में उनकी सजा को बरकरार रखा गया था।

बेंच ने क्या कहा?

एक नाबालिग के यौन शोषण मामले में सजा और उम्रकैद को बरकरार रखने वाले राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ आसाराम की अपील पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि जब वह सरेंडर कर देंगे, तो कोर्ट कानून के एक अहम सवाल पर मामले की सुनवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि उसने सबूतों और केस के रिकॉर्ड को देखा है और अपील में ऐसा कुछ भी नहीं है

जस्टिस पारदीवाला ने दवे से कहा, ‘जब तक आप हमें यह यकीन नहीं दिला पाते कि किसी चूक की वजह से पूरी सजा ही गलत साबित हो सकती है। तब तक हम इस पर विचार करेंगे। इसमें कहा गया कि कोर्ट ने सबूतों और केस के रिकॉर्ड को देखा है और अपील में कोई दम नहीं है।

आईपीएस की धारा 376 पर क्या कहा?

जस्टिस पारदीवाला ने दवे से कहा, ‘जब तक आप हमें यह यकीन नहीं दिलाते कि किसी चूक की वजह से पूरी सजा गलत साबित हो सकती है, तब तक हम इस पर विचार नहीं करेंगे।’ दवे ने कहा कि आसाराम को दूसरे आरोपों में दोषी ठहराया जा सकता है, लेकिन आईपीएस की धारा 376 के तहत नहीं, क्योंकि यह आरोप साबित नहीं हुआ था।

बेंच ने आदेश दिया, ‘हमें दोनों पक्षों के वकीलों ने बताया है कि दोषी याचिकाकर्ता पैरोल पर है। उसे 20 दिन की पैरोल दी गई है। इस मामले को 17 नवंबर के लिए लिस्ट करें। बेंच ने निर्देश दिया कि रजिस्ट्री ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड (डिजिटल और फिजिकल दोनों) मंगाए और एक सेट याचिकाकर्ता, राज्य और पीड़िता को भी उपलब्ध कराए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा?

राजस्थान और गुजरात की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि याचिकाकर्ता को राजस्थान और गुजरात, दोनों जगहों पर दोषी ठहराया गया था। आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में स्वास्थ्य के आधार पर पैरोल के लिए अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। मेहता ने कहा कि अपनी अर्जी खारिज होने के बाद आसाराम सुप्रीम कोर्ट गए थे।

मेहता ने कहा कि चूंकि गांधीनगर कोर्ट द्वारा रेप के एक अलग मामले में दोषी ठहराए जाने की वजह से उन्हें रिहा नहीं किया जा सका, इसलिए उन्होंने अंतरिम जमानत के लिए गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

उन्होंने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को पैरोल देने के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने फिर से राजस्थान हाई कोर्ट का रुख किया और कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘इस बीच, एक बैकअप रणनीति के तौर पर, उन्होंने अपनी पत्नी की खराब सेहत का हवाला देते हुए गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया, जिसे खारिज कर दिया गया। अब, वह 20 दिनों की पैरोल पर बाहर हैं।

पीड़ित पक्ष के वकील ने क्या बताया?

पीड़ित पक्ष के वकील ने बताया कि राजस्थान वाले मामले में, कोर्ट की एक बेंच ने पहले एम्स से आसाराम की मेडिकल स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी, क्योंकि याचिकाकर्ता मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग कर रहा था। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट से पता चला कि याचिकाकर्ता को उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं हैं और कोर्ट ने उन्हें तभी दोबारा याचिका दायर करने की इजाज़त दी थी अगर उनकी सेहत बिगड़ती है।