
कांग्रेस ने चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया। आराधना मिश्र ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वह अजय राय की जगह लेंगी। मोना तीन बार रामपुर खास से विधायक रह चुकी हैं। उनके पिता प्रमोद तिवारी भी कांग्रेस के बड़े नेता हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस ने यह बदलाव क्यों किया? मोना के सामने यूपी में कौन-सी बड़ी चुनौतियां होंगी? क्या उनकी नई जिम्मेदारी कांग्रेस की रणनीति बदलेगी? उनका सियासी सफर कैसा रहा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…
अगले साल की शुरुआत में अलग-अलग राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल अभी से गर्म है। इस बीच कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने अजय राय को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाकर अब आराधना मिश्रा उर्फ मोना को यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष पद सौंपा है। इस बड़े बदलाव को कांग्रेस की विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर आराधना मिश्रा ‘मोना’ कौन हैं? उनकी सियासी पहचान क्या है? निजी जीवन में आराधना के बारे में क्या-क्या सार्वजनिक है? क्यों पार्टी उत्तर प्रदेश में उन्हें आगे कर चुनाव की तरफ कदम बढ़ा रही है? आइये जानते हैं…
पहले जानें- कौन हैं आराधना मिश्रा?
आराधना मिश्रा ‘मोना’ की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी प्रतिष्ठित रही है। उनके पिता प्रमोद तिवारी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हैं, जो कि मौजूदा समय में राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं। वे उत्तर प्रदेश की रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार 9 बार विधायक रहे हैं और एक ही पार्टी व निशान से लगातार जीतने का उनका रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। खुद आराधना भी शुरुआती समय से ही सामाजिक कार्यों और इसके बाद राजनीति में सक्रिय रहीं। वे इलाहबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक तक की पढ़ाई कर चुकी हैं और इसके साथ ही लंबे समय तक एनजीओ से जुड़े कार्य भी संभाल चुकी हैं।
कितनी संपत्ति की मालकिन हैं आराधना मिश्रा?
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (रामपुर खास, प्रतापगढ़) के लिए दाखिल चुनावी हलफनामे के मुताबिक, आराधना मिश्रा ‘मोना’ की संपत्ति उनके पहले चुनाव (2014) से लेकर उनके हालिया चुनाव (2022) तक लगातार बढ़ी है।
सालाना आय
साल 2020-21 के आईटीआर के मुताबिक, उनकी खुद की सालाना आय लगभग ₹14.09 लाख थी। उनकी खुद की आय के लिए निवेश एक बड़ा स्रोत दर्शाया गया। वहीं, पति की वार्षिक आय ₹28.43 लाख थी, जिसक स्रोत कृषि और व्यवसाय दिखाया गया।
क्या है आराधना मिश्रा की राजनीतिक विरासत और खुद का सियासी सफर
आराधना की राजनीति और उनका राजनीतिक इतिहास मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट और कांग्रेस के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक विरासत और शुरुआती सफर
आराधना मिश्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। रामपुर खास सीट उनके परिवार का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है, जहां से उनके पिता 1980 से लगातार नौ बार विधायक रहे। एक ही पार्टी और चुनाव चिह्न से लगातार जीतने के कारण उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज है। प्रमोद तिवारी 1984 से 1989 के बीच दो बार राज्य मंत्री बने।
आराधना मिश्रा ने अपने पिता की इस विरासत क इस्तेमाल सीधे राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में आने के लिए नहीं किया। उनकी आर्काइव हो चुकी विधानसभा में आने से पहले उन्होंने स्थानीय शासन से सियासत की शुरुआत की। वे साल 2000 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य हैं। 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी की मीडिया अभियान समिति में रहकर रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
चुनावी इतिहास और विधानसभा का सफर
- साल 2013-14 में जब प्रमोद तिवारी राज्यसभा सदस्य चुने गए, तब रामपुर खास सीट से हुए उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने अपना पहला चुनाव लड़ा और इसमें जीत हासिल की और पहली बार विधायक बनीं।
- इसके बाद उन्होंने 2017 में भाजपा की लहर के बावजूद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की और पारंपरिक रामपुर खास सीट कांग्रेस के पास बनाए रखी।
- 2022 के विधानसभा चुनाव (18वीं विधानसभा) में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को 14,741 वोटों के अंतर से हराकर रामपुर खास से लगातार तीसरी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया
संगठन में नेतृत्व और मुख्य भूमिकाएं
- साल 2019 से वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल (सीएलपी) की नेता के रूप में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत मनरेगा की राज्य निगरानी एवं सतर्कता समिति की सदस्य भी रही हैं।
- आराधना मिश्रा को प्रियंका गांधी वाड्रा का करीबी माना जाता है। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में भी उनके साथ काम किया था।
- रामपुर खास क्षेत्र में बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों के निर्माण, सई नदी पर पुलों, अस्पतालों और विद्युत पावर हाउसों के विस्तार को उन्होंने अपने राजनीतिक और विकास एजेंडे में प्रमुखता दी है।
अन्य नियुक्तिया
कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में दो वरिष्ठ उपाध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। इनमें देविंदर निषाद और आलोक प्रसाद शामिल हैं। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। पार्टी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के योगदान की सराहना की है
